अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 336, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंमध्ये ह्रदस्य नो गृहाः पराचीना मुखा कृधि.. (२) हमारा वह घर जल का स्थान एवं सागर का निवेश बने. हमारे घर गहरे तालाबों के मध्य में हों. हे अग्नि! तुम अपने ज्वाला रूपी मुख हमारी ओर से फेर लो. (२) हिमस्य त्वा जरायुणा शाले परि व्ययामसि. शीतह्रदा हि नो भुवो ऽ निष्कृणोतु भेषजम्.. (३) हे शाला! हम तुझे हिमालय के शीतल जल से इस प्रकार घेरते हैं, जिस प्रकार जरायु गर्भ को तथा शैवाल जल को घेरता है. हे शाला! तू हमारे लिए शीतल जल वाली बन जा. हमारी प्रार्थना सुन कर अग्नि हमारे घरों को जलने से बचाने वाली ओषधि बनें. (३) सूक्त-१०७ देवता—विश्वजित् विश्वजित् त्रायमाणायै मा परि देहि. त्रायमाणे द्विपाच्च सर्वं नो रक्ष चतुष्पाद यच्च नः स्वम्.. (१) हे विश्वजित् देव! जगत् का पालन करने वाली देवी के लिए रक्षा के हेतु मुझ स्वस्त्ययन इच्छुक को दो. हे त्रायमाणा नामक देवी! हमारे दो पैरों वाले सभी पुत्र, पौत्र आदि की रक्षा करो तथा मेरे सभी चौपायों की भी रक्षा करो. (१) त्रायमाणे विश्वजिते मा परि देहि. विश्वजिद् द्विपाच्च सर्वं नो रक्ष चतुष्पाद यच्च नः स्वम्.. (२) हे पालन करने वाली देवी त्रायमाणा! मुझे विश्वजित् नाम के देवता को दे दो. हे सब को जीतने वाले! हमारे दो पैरों वाले पुत्र, पौत्र आदि और सभी चौपायों की रक्षा करो. (२) विश्वजित् कल्याण्यै मा परि देहि. कल्याणि द्विपाच्च सर्वं नो रक्ष चतुष्पाद यच्च नः स्वम्.. (३) हे विश्वजित्! मुझे सर्वमंगलकारिणी देवी को दे दो. हे कल्याणी! हमारे सभी दो पैरों वाले पुत्र, पौत्र आदि और चौपायों की रक्षा करो. (३) कल्याणि सर्वविदे मा परि देहि. सर्वविद् द्विपाच्च सर्वं नो रक्ष चतुष्पाद यच्च नः स्वम्.. (४) हे कल्याणी! मुझे सब कुछ जानने वाले देव को दे दो. हे सर्वहित! हमारे सभी दो पैरों वाले पुत्र, पौत्र आदि और चौपायों की रक्षा करो. (४) सूक्त-१०८ देवता—मेधा, अग्नि ebook converter DEMO Watermarks*