भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 404, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 404

स्वरूप बल के साथ स्थिर हो, तुम्हारा परिचारक यह यजमान अपनी कामनाएं प्राप्त करे तथा किसी से भी पराजित न हो. (३) अन्वग्निरुषसामग्रमख्यदन्वहानि प्रथमो जातवेदाः. अनु सूर्य उषसो अनु रश्मीननु द्यावापृथिवी आ विवेश.. (४) अग्नि देव प्रातःकाल के पूर्व से ही प्रकाशित होते हैं. महान जातवेद अग्नि इस के पश्चात दिनभर प्रकाशित रहते हैं. ये सूर्यात्मक अग्नि प्रातःकाल के पश्चात व्यापक किरणों के द्वारा प्रकाशित होते हैं. अग्नि का यह प्रकाश धरती और आकाश दोनों में प्रवेश कर के प्रकाशित करता है. (४) प्रत्यग्निरुषसामग्रमख्यत् प्रत्यहानि प्रथमो जातवेदाः. प्रति सूर्यस्य पुरुधा च रश्मीन् प्रति द्यावापृथिवी आ ततान.. (५) अग्नि देव प्रातःकाल से पूर्व ही प्रकाशित होते हैं. महान जातवेद अग्नि इस के पश्चात दिन भर प्रकाशित रहते हैं. अग्नि अनेक रूप से प्रवृत्त होने के कारण सूर्य की किरणों के रूप में स्वयं ही प्रकाशित होते हैं. इस प्रकार अग्नि देव धरती और आकाश में सभी जगह प्रकाशित होते हैं. (५) घृतं ते अग्ने दिव्ये सधस्थे घृतेन त्वां मनुरद्या समिन्धे. घृतं ते देवीर्नप्त्य १ आ वहन्तु घृतं तुभ्यं दुहतां गावो अग्ने.. (६) हे अग्नि! तुम से संबंधित हवि देवों के साथ उन के निवास स्थान अर्थात् स्वर्ग में है. इस समय हम तुम्हें घृत के द्वारा भलीभांति तृप्त करते हैं. हे अग्नि! तुम्हें दिव्य जल प्राप्त हो तथा गाएं तुम्हारे लिए घृत प्रदान करें. (६) सूक्त-८८ देवता—वरुण अप्सु ते राजन् वरुण गृहो हिरण्ययो मिथः. ततो धृतव्रतो राजा सर्वा धामानि मुञ्चतु.. (१) हे समस्त देवों के स्वामी वरुण! जलों के मध्य तुम्हारा स्वर्ण निर्मित निवास स्थान है, जहां दूसरे नहीं पहुंच सकते. इस कारण सच्चे कर्मों वाले राजा वरुण हमारे शरीर के सभी स्थानों को त्याग दें अर्थात् हमें जलोदर आदि रोग न हो. (१) धाम्नोधाम्नो राजन्नितो वरुण मुञ्च नः. यदापो अघ्न्या इति वरुणेति यदूचिम ततो वरुण मुञ्च नः.. (२) हे राजा वरुण! इन सभी रोग स्थानों से हमें त्याग दो तथा उन से संबंधी पापों से हमें बचाओ. हे जलों के स्वामी एवं हिंसा रहित वरुण! हम ने प्रसिद्ध देवों का नाम न ले कर जो ebook converter DEMO Watermarks*

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