भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 416, कुल 1063 में से

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हे इंद्र! तुम्हें बृहस्पति देव ने सोमपान के द्वारा अन्यत्र जाने से रोक दिया है. हे इंद्र! तुम सोम निचोड़ने वाले यजमान को धन आदि से पुष्ट करने के लिए हम स्तोताओं की स्तुतियां सुन कर आओ. (३) सूक्त-११६ देवता—वृषभ इन्द्रस्य कुक्षिरसि सोमधान आत्मा देवानामुत मानुषाणाम्. इह प्रजा जनय यास्त आसु या अन्यत्रेह तास्ते रमन्ताम्.. (१) हे छोड़े गए बैल! तुम सोम के आधार और इंद्र के उदर हो. तुम देवों और मनुष्यों के शरीर हो. तुम इस लोक में संतान उत्पन्न करो. सामने उपस्थित इस गांव में अथवा तुम्हारे निमित्त जो गाएं अन्यत्र विद्यमान हैं, उन में तुम्हारी प्रजाएं सुख से विहार करें. (१) सूक्त-११७ देवता—जल शुम्भनी द्यावापृथिवी अन्तिसुम्ने महिव्रते. आपः सप्त सुस्रुवुर्देवीस्ता नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१) शोभाकारिणी, द्यावा पृथिवी के मध्य जो अज्ञानावृत जन चेतन और अचेत की मध्यवर्ती दशा में वर्तमान हैं, वे सात प्रकार के दिव्य जल बरसाते हैं. ऐसे द्यावा पृथिवी हमें पाप कर्म से बचाएं. (१) मुञ्चन्तु मा शपथ्या ३ दथो वरुण्या दुत. अथो यमस्य पड्वीशाद् विश्वस्माद् देवकिल्बिषात्.. (२) जल अथवा ओषधियां मुझे ब्राह्मण के आक्रोश से उत्पन्न पाप से तथा असत्य भाषण के कारण लगने वाले पाप से छुड़ाएं. वे यम के पाशों से तथा देव संबंधी सभी पापों से मुझे बचाएं. (२) सूक्त-११८ देवता—तृष्टिका तृष्टिके तृष्टवन्दन उदमूं छिन्धि तृष्टिके. यथा कृतद्विषासो ऽ मुष्मै शैप्यावते.. (१) हे तृष्टिका अर्थात् दाह उत्पन्न करने वाली वाणापर्ण्य नामक जड़ीबूटी तथा हे दाह उत्पन्न करने वाली तृष्टवंदना नामक जड़ीबूटी! इस स्त्री को भोक्ता पुरुष से बलपूर्वक दूर करो. हे कोक उत्पन्न करने वाली जड़ीबूटी तृष्टिका! प्रजनन एवं संभोग में सक्षम इस पुरुष के लिए तू द्वेष करने वाली बन. (१) ebook converter DEMO Watermarks*

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