अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 427, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै, ये दोनों प्रकार के वस्त्र तेरे शरीर के लिए कल्याणकारी एवं सुखद हों. इस वस्त्र को मैं ऐसा बनाता हूं कि यह छूने में कठोर न लगे. (१६) यत् क्षुरेण मर्चयता सुतेजसा वप्ता वपसि केशश्मश्रु. शुभं मुखं मा न आयुः प्र मोषीः.. (१७) हे सविता देव! अथवा हजामत बनाने वाले पुरुष! जब तुम केश काटने वाले नाई हो कर शोभन तेज वाले उस्तरे को चलाते हो, सिर और दाढ़ी के बाल काटते हो, तब मुंडन किए जाते हुए इस बालक का मुख तेजस्वी बनाओ तथा इस की आयु को मत चुराओ. (१७) शिवौ ते स्तां व्रीहिवावाबलासावदोमधौ. एतौ यक्ष्मं वि बाधेते एतौ मुञ्चतो अंहसः.. (१८) हे अन्न खाते हुए बालक! तेरे खाने के लिए निश्चित किए गए गेहूं और जौ तेरे लिए सुखकारी एवं शरीर बढ़ाने वाले हों. उपयोग के पश्चात ये गेहूं और जौ तेरे शरीर को विशेष रूप से पीड़ित न करें और तुझे पाप से छुड़ाएं. (१८) यदश्नासि यत्पिबसि धान्यं कृष्याः पयः. यदाद्यं १ यदनाद्यं सर्वं ते अन्नमविषं कृणोमि.. (१९) हे कुमार! तुम जिस प्रकार के अनाज को कठिनता से खाते हो तथा दूध के समान सारवान पिसे हुए धान्य को पीते हो, जो अन्न सुख से खाने योग्य है तथा जो खाने में कठिन है, इन सभी प्रकार के अन्नों को मैं विषहीन बनाता हूं. (१९) अह्ने च त्वा रात्रये चोभाभ्यां परि दद्मसि. अरायेभ्यो जिघत्सुभ्य इमं मे परि रक्षत.. (२०) हे कुमार! मैं रक्षा के निमित्त तुझे दिन और रात अर्थात् दोनों के देवताओं के लिए देता हूं. हे देवताओ! तुम निर्धन के पास से तथा खाने वाले राक्षसों के पास से इस बालक की रक्षा करना. (२०) शतं ते ऽ युतं हायनान् द्वे युगे त्रीणि चत्वारि कृण्मः. इन्द्राग्नी विश्वे देवास्ते ऽ नु मन्यन्तामहृणीयमानाः.. (२१) हे बालक! मैं तेरी अवस्था के सौ वर्षों को हजार वर्ष, हजार वर्षों को दो युग, दो युगों को तीन युग और तीन युगों को चार युग बनाता हूं. इस प्रकार की प्रार्थना को प्रसिद्ध इंद्र, अग्नि तथा विश्वे देव लज्जा अथवा क्रोध न करते हुए स्वीकार करें. (२१) शरदे त्वा हेमन्ताय वसन्ताय ग्रीष्माय परि दद्मसि. वर्षाणि तुभ्यं स्योनानि येषु वर्धन्त ओषधीः.. (२२) ebook converter DEMO Watermarks*