भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 432, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 432

विषं गवां यातुधाना भरन्तामा वृश्चन्तामदितये दुरेवाः. परैणान् देवः सविता ददातु परा भागमोषधीनां जयन्ताम्.. (१६) गायों के दूध की कामना करते हुए राक्षस उन से विष प्राप्त करें. दुष्ट गति वाले राक्षस सब को आश्रय देने वाली पृथिवी के सुख के लिए छिन्नभिन्न हो जाएं अर्थात् भूमि पर प्राप्त होने वाले पदार्थों को न पा सकें. सविता देव ये राक्षस वधिकों को सौंप दे. ये सब गेहूं, जौ आदि के भागीदार न बनें. (१६) संवत्सरीणं पय उस्रियायास्तस्य माशीद् यातुधानो नृचक्षः. पीयूषमग्ने यतमस्तितृप्सात् तं प्रत्यञ्चमर्चिषा विध्य मर्मणि.. (१७) हे मनुष्यों को देखने वाले अग्नि देव! राक्षस हमारी गायों के वर्ष में होने वाले गर्भाधान, प्रसव आदि को नष्ट न करें तथा उन का दूध न पिएं. उन में से जो राक्षस हवि रूपी अमृत एवं गो घृत से अपनेआप को तृप्त करना चाहे, उस राक्षस को अपनी ज्वाला से ताड़ित कर के विमुख करो. (१७) सनादग्ने मृणसि यातुधानान् न त्वा रक्षांसि पृतनासु जिग्युः. सहमूराननु दह क्रव्यादो मा ते हेत्या मुक्षत दैव्यायाः.. (१८) हे अग्नि देव! तुम चिरकाल से राक्षसों का हनन करते हो, फिर भी राक्षस युद्धों में तुम्हें जीत नहीं सकते हैं. इसलिए तुम मांसाहारी राक्षसों को मूल सहित जला दो. वे तुम्हारे दैवी आयुध से न बच सकें. (१८) त्वं नो अग्ने अधरादुदक्तस्त्वं पश्चादुत रक्षा पुरस्तात्. प्रति त्ये ते अजरासस्तपिष्ठा अघशंसं शोशुचतो दहन्तु.. (१९) हे अग्नि देव! तुम नीचे की दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से, ऊपर की दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से तथा पूर्व दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से हमारी रक्षा करो. सर्वत्र वर्तमान तुम्हारी चिनगारी पापी राक्षसों का विनाश करे. हे राक्षस! अग्नि देव वृद्ध न होने वाले, अतिशय संतापकारी एवं दीप्ति वाले हैं. (१९) पश्चात् पुरस्तादधरादुतोत्तरात् कविः काव्येन परि पाह्यग्ने. सखा सखायमजरो जरिम्णे अग्ने मर्ताँ अमर्त्यस्त्वं नः.. (२०) हे सब कुछ जानने वाले अग्नि देव! तुम क्रांतदर्शी हो. इसलिए दक्षिण, उत्तर, पूर्व और पश्चिम दिशाओं से बाधा पहुंचाने वाले राक्षसों को जानते हो. तुम अपने रक्षा व्यापारों के द्वारा हमारी रक्षा करो. तुम मेरे सखा हो, इसलिए अपने सखा अर्थात् मेरी रक्षा करो. हे अग्नि देव! तुम वृद्धावस्था रहित हो, मुझ वृद्ध और दुर्बल की रक्षा करो. तुम मरण रहित हो, मुझ मरणधर्मा की रक्षा करो. (२०) eBook converter DEMO Watermarks*