भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 459

षड्योगं सीरमनु सामसाम षडाहुर्द्यावापृथिवीः षडुर्वीः.. (१६) ऋतु अर्थात् सत्य से पहलेपहल छः ने जन्म लिया. छः साम दिन के छः विभागों को वहन करते हैं. छः साम पृथ्वी का अनुगमन करते हैं. धरती, आकाश एवं छः मास ये सब उष्णता से संबंधित हैं. (१६) षडाहुः शीतान् षडु मास उष्णानृतुं नो ब्रूत यतमो ऽ तिरिक्तः. सप्त सुपर्णाः कवयो नि षेदुः सप्त च्छन्दांस्यनु सप्त दीक्षाः.. (१७) छः मास शीत ऋतु के और छः मास ग्रीष्म ऋतु के कहे गए हैं. हमें सत्य बताओ कि उन के अतिरिक्त कौन है. विद्वान् लोग सात सुंदर पर्णों, सात छंदों और सात दीक्षाओं को जानते हैं. (१७) सप्त होमाः समिधो ह सप्त मधूनि सप्तर्तवो ह सप्त. सप्ताज्यानि परि भूतमायन् ताः सप्तगृध्रा इति शुश्रुमा वयम्.. (१८) सात होमों की सात समिधाएं, सात मधु और सात ऋतुएं हैं. पुरुष को सात प्रकार के घृत प्राप्त होते हैं. हम ने ऐसा भी सुना है कि इसी प्रकार गृध्र भी सात हैं. (१८) सप्त च्छन्दांसि चतुरुत्तराण्यन्यो अन्यस्मिन्नध्यार्पितानि. कथं स्तोमाः प्रति तिष्ठन्ति तेषु तानि स्तोमेषु कथमार्पितानि.. (१९) सात छंद और चार उत्तर अर्थात् वेद परस्पर संबंधित हैं. ये दोनों प्रकार के सात एकदूसरे में स्थित हैं. स्तोम उन में किस प्रकार स्थित रहते हैं तथा वे स्तोत्रों में किस प्रकार समाहित हैं? (१९) कथं गायत्री त्रिवृतं व्याप कथं त्रिष्टुप् पञ्चदशेन कल्पते. त्रयस्त्रिंशेन जगती कथमनुष्टुप् कथमेकविंशः.. (२०) त्रिवृत में गायत्री किस प्रकार व्याप्त तथा त्रिष्टुप् पंद्रह वर्णों से किस प्रकार निर्मित होता है. जगती छंद तैंतीस वर्णों से किस प्रकार बनता है और अनुष्टुप् में इक्कीस वर्ण किस प्रकार होते हैं. (२०) अष्ट जाता भूता प्रथमजर्तस्याष्टेन्द्रर्त्विजो दैव्या ये. अष्टयोनिरदितिरष्टपुत्राष्टमीं रात्रिमभि हव्यमेति.. (२१) ऋतु से सर्वप्रथम आठ भूत अर्थात् तत्त्व उत्पन्न हुए. हे इंद्र! वे आठों दिव्य ऋत्विज् हैं. आठ योनियों और आठ पुत्रों वाली अदिति अष्टमी तिथि की रात में हव्य ग्रहण करती हैं. (२१) ebook converter DEMO Watermarks*