भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 461, कुल 1063 में से

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सोदक्रामत् सा गार्हपत्ये न्यक्रामत्.. (२) उस विराट् ने उत्क्रम किया. वह जल बन कर गार्हपत्य अग्नि में प्रवेश कर गया. (२) गृहमेधी गृहपतिर्भवति य एवं वेद.. (३) जो गृहपति इस प्रकार जानता है, वह गृहमेधि बन जाता है. (३) सोदक्रामत् साहवनीये न्यक्रामत्.. (४) उस विराट् ने पुनः उत्क्रम किया और आह्वनीय अग्नि में प्रवेश कर गया. (४) यन्त्यस्य देवा देवहूतिं प्रियो देवानां भवति य एवं वेद.. (५) जो इस बात को जानता है, वह देवों का प्रिय हो जाता है और उस के आह्वान पर देवगण पधारते हैं. (५) सोदक्रामत् सा दक्षिणाग्नौ न्यक्रामत्.. (६) उस विराट् ने पुनः उत्क्रम किया और वह दक्षिणाग्नि में प्रवेश कर गया. (६) यज्ञर्तों दक्षिणीयो वासतेयो भवति य एवं वेद.. (७) जो इस बात को जानता है, वह यज्ञ, ऋत और दक्षिणाग्नि में निवास करने वाला बनता है. (७) सोदक्रामत् सा सभायां न्यक्रामत्.. (८) विराट् ने पुनः उत्क्रम किया तथा वह सभा में प्रवेश कर गया. (८) यन्त्यस्य सभां सभ्यो भवति य एवं वेद.. (९) जो इस बात को जानता है, वह सभ्य अर्थात् सभा में बैठने योग्य बनता है और उस की सभा में सभी जाते हैं. (९) सोदक्रामत् सा समितौ न्यक्रामत्.. (१०) उस ने पुनः उत्क्रम किया और वह समिति में प्रवेश कर गया. (१०) यन्त्यस्य समितिं सामित्यो भवति य एवं वेद.. (११) जो इस को जानता है, वह समित्य अर्थात् समिति में सम्मिलित होने योग्य बन जाता है. उस की समिति में सभी सम्मिलित होते हैं. (११) ebook converter DEMO Watermarks*