भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 482, कुल 1063 में से

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यह शक्तिशाली वृषभ अर्थात् बैल हजारों गायों को गर्भिणी बनाने में समर्थ है. यह अपनी वीर्यवाहिनी नाड़ियों में अनेक रूप धारण करता है. बृहस्पति संबंधी मंत्रों से युक्त यह बैल गायों के योग्य है. यह दान देने वाले यजमान का मंगल करता हुआ अपनी संतान की वृद्धि करे. (१) अपां यो अग्रे प्रतिमा बभूव प्रभूः सर्वस्मै पृथिवीव देवी. पिता वत्सानां पतिरघ्न्यानां साहसे पोषे अपि नः कृणोतु.. (२) जो बैल जलों के समान एवं प्रतिमा के समान खड़ा हुआ, जो पृथ्वी के समान सब का स्वामी है, जो बछड़ों का पिता तथा हिंसा न करने योग्य गायों का पति है, वह हमें हजारों प्रकार से संपन्न बनाए. (२) पुमानन्तर्वान्तःस्थविरः पयस्वान् वसोः कबन्धमृषभो बिभर्ति. तमिन्द्राय पथिभिर्देवयानैर्हुतमग्निर्वहतु जातवेदाः.. (३) वसु के कबंध को धारण करने वाला यह बैल पुमान अर्थात् नर, आंतरिक शक्ति वाला एवं वीर्ययुक्त है. जन्म लेने वालों को जानने वाले अग्नि देव देवों के मार्ग से हमें इंद्र तक पहुंचाएं. (३) पिता वत्सानां पतिरघ्न्यानामथो पिता महतां गर्गराणाम्. वत्सो जरायु प्रतिधुक् पीयूष आभिक्षा घृतं तद् वस्य रेतः.. (४) बैल बछड़ों का पिता एवं हिंसा के अयोग्य गायों का पति होने के साथ ही गरजने वाले मेघों का पालनकर्ता भी है. इस बैल का वीर्य, बछड़ा, जरायु (जेर) प्रतिधुक, अमृत, आभिक्षा एवं घृत के समान है. (४) देवानां भाग उपनाह एषो ३ पां रस ओषधीनां घृतस्य. सोमस्य भक्षमवृणीत शक्रो बृहन्नद्रिरभवद् यच्छरीरम्.. (५) यह जड़ीबूटियों का रस जलों एवं घृत का भाग है. उपनय देवों का भाग है. इंद्र ने सोम के भक्षण के लिए अर्थात् सोमरस पीने के लिए पर्वत के समान विशाल शरीर धारण किया था. (५) सोमेन पूर्णं कलशं बिभर्षि त्वष्टा रूपाणां जनिता पशूनाम्. शिवास्ते सन्तु प्रजन्व इह या इमा न्य१स्मभ्यं स्वधिते यच्छ या अमूः.. (६) हे स्वधिति! तुम सोमरस से भरा हुआ कलश धारण करती हो. त्वष्टा पशुओं को आकार देने वाले हैं. जन्म लेने वाले तुम्हारे लिए मंगलकारी हों. तुम अपनी इन संतानों को हमें प्रदान करो. (६) ebook converter DEMO Watermarks*