अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 483, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंआज्यं बिभर्ति घृतमस्य रेतः साहस्रः पोषस्तमु यज्ञमाहुः. इन्द्रस्य रूपमृषभो वसानः सो अस्मान् देवाः शिव ऐतु दत्तः.. (७) यह बैल आज्य अर्थात् यज्ञ के कारण रूप दूध आदि को धारण करता है. घृत इस का वीर्य है. यह जिन सहस्रों पुष्टियों को प्रदान करता है, उन्हीं को यज्ञ कहा जाता है. हे देवो! इंद्र का रूप धारण करता हुआ एवं यजमान के द्वारा दिया हुआ यह बैल हमारे लिए शुभ हो. (७) इन्द्रस्यौजो वरुणस्य बाहू अश्विनोरंसौ मरुतामियं ककुत्. बृहस्पतिं संभृतमेतमाहुर्ये धीरासः कवयो ये मनीषिणः.. (८) जो धीर, मनीषी एवं विद्वान् पुरुष हैं, वे बताते हैं कि इस बैल का ओज अर्थात् बल इंद्र का भाग है, इस के बाहु अर्थात् पैर वरुण के भाग हैं, इस का कंधा अश्विनीकुमारों का भाग है और इस की ठाट मरुतों का भाग है. इस का संभृत बृहस्पति का भाग है. (८) दैवीर्विशः पयस्वाना तनोषि त्वामिन्द्रं त्वां सरस्वन्तमाहुः. सहस्रं स एकमुखा ददाति यो ब्राह्मण ऋषभमाजुहोति.. (९) हे बैल! तू अपने दूध आदि से देवों का विस्तार करता है. तुझे इंद्र एवं सारस्वत कहा गया है. जो ब्राह्मण मंत्रों द्वारा संपन्न होने वाले यज्ञ में बैल का दान करता है, वह एक मुख वाली हजारों गायों के दान का पुण्य प्राप्त करता है. (९) बृहस्पतिः सविता ते वयो दधौ त्वष्टुर्वायोः पर्यात्मा त आभृतः. अन्तरिक्षे मनसा त्वा जुहोमि बर्हिष्टे द्यावापृथिवी उभे स्ताम्.. (१०) बृहस्पति एवं सविता ने तेरी आयु को धारण किया है. त्वष्टा एवं वायु ने तेरे संपूर्ण शरीर में आत्मा को धारण किया है. मैं मन से अंतरिक्ष में तेरी आहुति देता हूं. धरती तथा आकाश दोनों तेरे बर्हि अर्थात् कुश हों. (१०) य इन्द्र इव देवेषु गोष्वेति विवावदत्. तस्य ऋषभस्याङ्गानि ब्रह्मा सं स्तौतु भद्रया.. (११) जिस प्रकार इंद्र देवों के मध्य में आते हैं, उसी प्रकार यह बैल गर्जन करता हुआ गायों के मध्य जाता है. ब्रह्मा अपनी मंत्रमयी कल्याणी वाणी से इस बैल के अंगों की स्तुति करें. (११) पार्श्वे आस्तामनुमत्या भगस्यास्तामनूवृजौ. अष्ठीवन्तावब्रवीन्मित्रो ममैतौ केवलाविति.. (१२) इस बैल के पार्श्व अर्थात् दोनों ओर के भाग अनुमति के हैं तथा इस के अनुबृज अर्थात् पीछे चलने वाले भाग अग्नि देव के हैं. मित्र देव ने कहा था कि बैल के केवल टखने मेरे भाग ebook converter DEMO Watermarks*