अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 497, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंचाहे जितना स्वादिष्ट हो, पर यजमान को गाय का दूध और मांस नहीं खाना चाहिए. (९) सूक्त-९ देवता—अतिथि, विद्या स य एवं विद्वान् क्षीरमुपसिच्योपहरति.. (१) जो इस बात को जानता है, वह दूध का उपसेचन कर के अतिथि के लिए भोजन लाता है. (१) यावदग्निष्टोमेनेष्ट्वा सुसमृद्धेनावरुन्द्धे तावदेनेनाव रुन्द्धे.. (२) यजमान अग्निष्टोम यज्ञ के द्वारा स्वर्ग में जितना समृद्धिपूर्ण स्थान पा सकता है, उतना ही अतिथि सेवा के द्वारा प्राप्त कर सकता है. (२) स य एवं विद्वान्सर्पिरुपसिच्योपहरति.. (३) इस का ज्ञाता घी का उपसेचन कर के अतिथि के लिए भोजन लाता है. (३) यावदतिरात्रेणेष्ट्वा सुसमृद्धेनावरुन्द्धे तावदेनेनाव रुन्द्धे.. (४) अतिरात्र यज्ञ के द्वारा यजमान स्वर्ग में जितना समृद्धि पूर्ण पद प्राप्त कर सकता है, उतना ही अतिथि सेवा के द्वारा प्राप्त करता है. (४) स य एवं विद्वान् मधूपसिच्योपहरति.. (५) जो इस बात को जानता है, वह मधुर शहद का उपसेचन कर के अतिथि के लिए भोजन लाता है. (५) यावत् सत्रसद्येनेष्ट्वा सुसमृद्धेनावरुन्द्धे तावदेनेनाव रुन्द्धे.. (६) यजमान सत्र यज्ञ कर के स्वर्ग में जो समृद्धि पूर्ण स्थान प्राप्त करता है, उसे अतिथि की सेवा के द्वारा पाया जा सकता है. (६) स य एवं विद्वान् मांसमुपसिच्योपहरति.. (७) जो इस बात को जानता है, वह मांस का उपसेचन कर के अतिथि के लिए भोजन लाता है. (७) यावद् द्वादशाहेनेष्ट्वा सुसमृद्धेनावरुन्द्धे तावदेनेनाव रुन्द्धे.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*