अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 502, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंककुद, अर्थात् ठाट तथा बृहती छंद हड्डियां हैं. (५) देवानां पत्नी: पृष्टय उपसद: पर्शव:.. (६) देवों की पत्नियां गाय की पसलियां हैं और उपसद उस की कोखें हैं. (६) मित्रश्च वरुणश्चांसौ त्वष्टा चार्यमा च दोष्णी महादेवो बाहू.. (७) मित्र और वरुण गाय के कंधे हैं, त्वष्टा तथा अर्यमा गाय की भुजाएं अर्थात् अगले पैर हैं तथा महादेव बाहु हैं. (७) इन्द्राणी भसद् वायु: पुच्छं पवमानो बाला:.. (८) इंद्राणी गाय की कमर है. वायु पूंछ है और पवमान बाल हैं. (८) ब्रह्म च क्षत्रं च श्रोणी बलमूरू.. (९) ब्राह्मण और क्षत्रिय गाय के नितंब हैं तथा बल उस की जंघाएं हैं. (९) धाता च सविता चाष्ठीवन्तौ जङ्घा गन्धर्वा अप्सरस: कुष्ठिका अदिति: शफा:.. (१०) धाता और सविता गाय के होंठ, गंधर्व जंघाएं, अप्सराएं कोखें और अदिति शफ अर्थात् खुर हैं. (१०) चेतो हृदयं यकृन्मेधा व्रतं पुरीतत्.. (११) चेत गाय का हृदय, यकृत अर्थात् जिगर मेधा अर्थात् बुद्धि है तथा व्रत पुरीतत (आंत) नाड़ी है. (११) क्षुत् कुक्षिरिरा वनिष्ठ: पर्वता: प्लाशय:.. (१२) पर्वत बैल की प्लाशि (छोटी आंत) है, इरा उस की बड़ी आंत है और भूख के अभिमानी देवता इस की कोख हैं. (१२) क्रोधो वृक्कौ मन्युराण्डौ प्रजा शेप:.. (१३) क्रोध इस के गुरदे हैं, मन्यु इस के अंडकोष हैं और प्रजा इस का जननांग है. (१३) नदी सूत्री वर्षस्य पतय स्तना स्तनयित्नुरूध:.. (१४) नदी इस गाय का मूत्र, वर्ष के स्वामी इस के थन और मेघगर्जन इस का एन है. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*