भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 503

विश्वव्यचाश्चर्मौषधयो लोमानि नक्षत्राणि रूपम्.. (१५) विश्वव्यचा इस का चर्म है, जड़ीबूटियां इस के लोम हैं तथा नक्षत्र इस का रूप है. (१५) देवजना गुदा मनुष्या आन्त्रान्यत्रा उदरम्.. (१६) देवजन इस की गुदा, मनुष्य आंतें तथा अन्न उदर है. (१६) रक्षांसि लोहितमितरजना ऊबध्यम्.. (१७) राक्षस इस के लोहित अर्थात रक्त और अन्य जन इस के ऊवध्य हैं. (१७) अभ्रं पीबो मज्जा निधनम्.. (१८) बादल इस का मोटापा है तथा निधन मज्जा अर्थात् चरबी है. (१८) अग्निरासीन उत्थितो ऽ श्विना.. (१९) अग्नि इस की बैठी हुई दशा और दोनों अश्विनीकुमार इस की उठी हुई दशा हैं. (१९) इन्द्रः प्राङ् तिष्ठन् दक्षिणा तिष्ठन् यमः.. (२०) इंद्र इस का पूर्व दिशा में तथा यम इस का दक्षिण दिशा में ठहरना है. (२०) प्रत्यङ् तिष्ठन् धातोदङ् तिष्ठन्त्सविता.. (२१) पूर्व दिशा में गाय का ठहरना इंद्र तथा दक्षिण दिशा में ठहरी हुई गाय यम है. (२१) तृणानि प्राप्तः सोमो राजा.. (२२) पश्चिम दिशा में ठहरी हुई गाय और उत्तर दिशा में ठहरी हुई गाय सविता हैं. (२२) मित्र ईक्षमाण आवृत्त आनंदः.. (२३) गाय को घास के तिनकों की प्राप्ति सोम राजा है. (२३) युज्यमानो वैश्वदेवो युक्तः प्रजापतिर्विमुक्तः सर्वम्.. (२४) गाय का देखना मित्र और लौटना आनंद है. (२४) एतद् वै विश्वरूपं सर्वरूपं गोरूपम्.. (२५) विश्व का यह रूप ही गाय का रूप है. (२५) ebook converter DEMO Watermarks*