अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहे कृत्या! तू घी से भीगी हुई, भलीभांति अलंकृत और बुरे कर्म करने वाली है. जिस प्रकार पुत्री अपने पिता को जानती है, उसी प्रकार तू अपने रचयिता को जान अर्थात् उसी के समीप लौट जा. (२५) परेहि कृत्ये मा तिष्ठो विद्धस्येव पदं नय. मृगः स मृगयुस्त्वं न त्वा निकर्तुमर्हति.. (२६) हे कृत्या! तू यहां से चली जा, यहां ठहर मत. जिस प्रकार सिंह घायल हरिण के स्थान की ओर जाता है, उसी प्रकार तू अपने बनाने वाले के पास चली जा. तेरा बनाने वाला हरिण के समान है और तू सिंह के समान है, अतएव वह तुझे नष्ट नहीं कर सकता. (२६) उत हन्ति पूर्वासिनं प्रत्यादायापर इष्वा. उत पूर्वस्य निघ्नतो नि हन्त्यपरः प्रति.. (२७) प्रथम बैठे हुए व्यक्ति को दूसरा मनुष्य बाण से मार डालता है. मारने वाले को अन्य मनुष्य मार डालता है. हे कृत्या! तू अपने बनाने वाले के समीप लौट जा. (२७) एतद्धि शृणु मे वचो ऽ थेहि यत एयथ. यस्त्वा चकार तं प्रति.. (२८) हे कृत्या! मेरी यह बात सुन. तू जहां से यहां आई है और जिस ने तेरा निर्माण किया है, तू वहीं जा. (२८) अनागोहत्या वै भीमा कृत्ये मा नो गामश्वं पुरुषं वधीः. यत्रयत्रासि निहिता ततस्त्वोत्थापयामसि पर्णाल्लघीयसी भव.. (२९) निरपराध की हत्या करना भयंकर कर्म है. तू हमारी गायों, अश्वों, और पुरुषों की हत्या मत कर. तुझे जहांजहां स्थापित किया गया है, वहांवहां से हम तुझे हटाते हैं. तू पत्ते से भी हलकी हो जा. (२९) यदि स्थ तमसावृता जालेनाभिहिता इव. सर्वाः संलुप्येतः कृत्याः पुनः कर्त्रे प्र हिण्मसि.. (३०) हे कृत्याओ! यदि तुम अंधकार से ढकी हुई और जाल में फंसी हुई के समान विवश हो तो हम तुम सब को यहां से दूर भगाते हैं और तुम्हारे रचयिताओं के पास भेजते हैं. (३०) कृत्याकृतो वलगिनोऽभिनिष्कारिणः प्रजाम्. मृणीहि कृत्ये मोच्छिषोऽमून कृत्योकृतो जहि.. (३१) हे कृत्या! तू अपने रचयिता कपटी की संतान का विनाश कर. हे कृत्या! इन्हें मत छोड़. तू अपने रचयिता का विनाश कर दे. (३१) ebook converter DEMO Watermarks*