भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 523, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 523

कः सप्त खानि वि ततर्द शीर्षणि कर्णाविमौ नासिके चक्षणी मुखम्. येषां पुरुत्रा विजयस्य मह्मानि चतुष्पादो द्विपदो यन्ति यामम्.. (६) मनुष्य के सिर में सात छेद अर्थात् दो कान, दो नथुने, दो आंखें और एक मुख किस देव ने बनाया? इन्हीं देवों की महिमा से दो पैरों और चार पैरों वाले प्राणी अनेक स्थानों में गति करते हुए यमराज के स्थान पर जाते हैं. (६) हन्वोर्हि जिह्वमदधात् पुरूचीमधा महीमधि शिश्राय वाचम्. स आ वरीवर्ति भुवनेष्वन्तरपो वसानः क उ तच्चिकेत.. (७) अनेक स्थलों को छूने वाली जीभ को ठोड़ी में किस ने स्थापित किया? जीभ में वाणी की स्थापना किस ने की. अपने शरीर के भीतर जल को धारण करता हुआ कौन सा देव प्राणियों में व्याप्त है? उस का जानने वाला कौन है? (७) मस्तिष्कमस्य यतमो ललाटं ककाटिकां प्रथमो यः कपालम्. चित्वा चित्यं हन्वोः पुरुषस्य दिवं रुरोह कतमः स देवः.. (८) इस का मस्तिष्क, ललाट और जबड़ों के जोड़ एवं कपाल किस ने बनाया? वह देव कौन सा है? पुरुष की ठोड़ी की हड्डियों को जोड़ कर जो स्वर्ग को गया था, वह देव कौन सा है? (८) प्रियाप्रियाणि बहुला स्वप्नं संबाधतन्द्रयः. आनन्दानुग्रो नन्दांश्च कस्माद् वहति पूरुषः.. (९) मनुष्य के प्रिय और अप्रिय स्वप्नों को, संबंधित इंद्रियों को, आनंद को तथा दुःख को कौन सा देव धारण करता है? (९) आर्तिरवर्तिर्निर्ऋतिः कुतो नु पुरुषे ऽ मतिः. राद्धिः समृद्धिव्र्युद्धिर्मतिरूदितयः कुतः.. (१०) पुरुष में पाप, आजीविका विरोधी तत्त्व, दुष्कर्म आदि कहां से प्राप्त होते हैं? इसे ऋद्धि, सिद्धि, समृद्धि, बुद्धि एवं उन्नति कहां से प्राप्त होती है. (१०) को अस्मिन्नापो व्यदधाद् विषूवृतः पुरूवृतः सिन्धुसृत्याय जाताः. तीव्रा अरुणा लोहिनीस्ताम्रधूम्रा ऊर्ध्वा अवाचीः पुरुषे तिरश्चीः.. (११) इस पुरुष में सर्वत्र विद्यमान सागर को और सदा तेजी से बहने वाले जलों को किस ने प्रविष्ट किया है जो लाल, लोहित, तांबई एवं धुमेले रंग के हैं? इन जलों को ऊपर, नीचे और तिरछा जाने की शक्ति किस ने प्रदान की? (११) ebook converter DEMO Watermarks*