अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 525, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुरुष ने किस प्रकार से भूमि को आवृत्त किया तथा यह किस प्रभाव से स्वर्ग पर आरूढ़ हुआ? यह पुरुष किस प्रभाव से पर्वतों पर आरोहण करता और कर्म करता है? (१८) केन पर्जन्यमन्वेति केन सोमं विचक्षणम्. केन यज्ञं च श्रद्धां च केनास्मिन् निहितं मन:.. (१९) यह पुरुष किस प्रभाव से बादलों को प्राप्त करता और सोमलता को खोजता है? यह पुरुष यज्ञ को और श्रद्धा को किस के द्वारा प्राप्त करता है तथा इस के मन को उत्तम कर्मों में किस ने संलग्न किया है? (१९) केन श्रोत्रियमाप्नोति केनेमं परमेष्ठिनम्. केनेममग्निं पूरुषः केन संवत्सरं ममे.. (२०) यह पुरुष किस के द्वारा श्रोत्रिय ब्राह्मण को प्राप्त करता है? यह किस के द्वारा परमेष्ठी को पाता है? यह पुरुष अग्नि को किस के द्वारा प्रेरित करता है और संवत्सर की गणना कैसे कर पाता है? (२०) ब्रह्म श्रोत्रियमाप्नोति ब्रह्मेमं परमेष्ठिनम्. ब्रह्मेममग्निं पूरुषो ब्रह्म संवत्सरं ममे.. (२१) ब्रह्म श्रोत्रिय को प्राप्त करता है और ब्रह्म ही परमेष्ठी को प्राप्त करता है. ब्रह्म ही यह पुरुष है और अग्नि को प्राप्त करता है तथा संवत्सर की गणना करता है. (२१) केन देवाँ अनु क्षियति केन दैवजनीर्विशः. केनेदमन्यन्नक्षत्रं केन सत् क्षत्रमुच्यते.. (२२) पुरुष किस कर्म के द्वारा देवों की अनुकूलता प्राप्त करता है तथा किस कर्म को देवी प्रजा के अनुकूल बनाता है. यह पुरुष इस कर्म के द्वारा क्षत्र नहीं बनता और किस कर्म के द्वारा क्षत्र कहलाता है? (२२) ब्रह्म देवाँ अनु क्षियति ब्रह्म दैवजनीर्विशः. ब्रह्मेदमन्यन्नक्षत्रं ब्रह्म सत् क्षत्रमुच्यते.. (२३) ब्रह्म देवों के अनुकूल रहता है तथा ब्रह्म ही दैवी प्रजाओं के अनुकूल व्यवहार करता है. ब्रह्म ही क्षत्र का अभाव है और ब्रह्म ही उत्तम धन कहलाता है. (२३) केनेयं भूमिविर्हिता केन द्यौरुत्तरा हिता. केनेदमूर्ध्वं तिर्यक् चान्तरीक्षं व्यचो हितम्.. (२४) इस भूमि को किस ने स्थापित किया है तथा द्यौ को इस के ऊपर किस ने स्थित किया ebook converter DEMO Watermarks*