भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 538, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 538

हे जलो! तुम पितरों के भाग हो. तुम जलों का वीर्य और दिव्य तेज हम में धारण करो. लोक के कल्याण के लिए तुम हम में प्रजापति का तेज स्थित करो. (१३) देवस्य सवितुर्भाग स्थ. अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त. प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (१४) हे जलो! तुम सविता देव के भाग हो. तुम जलों का वीर्य एवं दिव्य तेज हम में धारण करो. लोक कल्याण के निमित्त तुम हम में प्रजापति का तेज स्थित करो. (१४) यो व आपो ऽ पां भागो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजन:. इदं तमति सृजामि तं माध्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्म:. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (१५) हे जलो! तुम्हारा जो जलीय भाग यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा सेवा करने योग्य एवं देवों से संयुक्त है, उसे मैं अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. वह जलीय भाग मुझे पुष्ट करे. मैं इस मंत्र से होने वाले जादूटोने के द्वारा और जलरूप वस्त्र से आच्छादित कर के उन्हें नष्ट करता हूं. (१५) यो व आपो ऽ पामूर्मिरप्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजन:. इदं तमति सृजामि तं माध्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्म:. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (१६) हे जलो! तुम्हारी जो लहरें यजुर्वेद के मंत्रों से सेवा करने योग्य एवं देवों से संयुक्त हैं, मैं उन्हें अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. वे लहरें मुझे पुष्ट करें. मैं इस मंत्र के द्वारा होने वाले जादूटोने से और जल की लहरों रूपी शस्त्र से आच्छादित कर के उन्हें नष्ट करता हूं. (१६) यो व आपो ऽ पां वत्सो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजन:. इदं तमति सृजामि तं माध्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्म:. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (१७) हे जलो! तुम में जो जलों का वत्स है, वह यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा सेवा करने योग्य है एवं देवों से संयुक्त है. मैं उसे अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. जलों के वे वत्स मुझे पुष्ट करें. मैं इस मंत्र के द्वारा होने वाले जादूटोने से और जल के वत्स रूपी शस्त्र से आच्छादित कर के उन्हें नष्ट करता हूं. (१७) ebook converter DEMO Watermarks*