भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 539

यो व आपो ऽ पां वृषभो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजनः. इदं तमति सृजामि तं माभ्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (१८) हे जलो! तुम में जो वृषभ अर्थात् बैल है, वह यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा सेवा करने योग्य है एवं देवों से संयुक्त है. उसे मैं अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. जल का वृषभ मुझे पुष्ट करे. मैं इस मंत्र के द्वारा होने वाले जादूटोने से और जल के वृषभ रूपी शस्त्र से उन्हें नष्ट करता हूं. (१८) यो व आपो ऽ पां हिरण्यगर्भो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजनः. इदं तमति सृजामि तं माभ्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (१९) हे जलो! तुम्हारे मध्य जो हिरण्यगर्भ है, वह यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा सेवा करने योग्य है एवं देवों से संयुक्त है. उसे मैं अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. जल का हिरण्यगर्भ अंश मुझे पुष्ट करे. मैं इस मंत्र के द्वारा होने वाले जादूटोने से और जल के हिरण्यगर्भ रूपी शस्त्र से उन्हें नष्ट करता हूं. (१९) यो व आपो ऽ पामश्मा पृश्रिर्दिव्यो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्यो देवयजनः. इदं तमति सृजामि तं माभ्यवनिक्षे. तेन तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (२०) हे जलो! तुम में जो दिव्य पृश्रि अश्मा है, वह यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा सेवा करने योग्य है एवं देवों से संयुक्त है; उसे मैं अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. जल का दिव्य पृश्रि अश्मा अंश मुझे पुष्ट करे. मैं इस मंत्र के द्वारा होने वाले जादूटोने से और जल के दिव्य पृश्रि अश्मा रूपी शस्त्र से उन्हें नष्ट करता हूं. (२०) यो व आपो ऽ पामग्नयो ३ प्सव १ न्तर्यजुष्या देवयजनाः. इदं तानति सृजामि तान् माभ्यवनिक्षि. तैस्तमभ्यतिसृजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. तं वधेयं तं स्तृषीयानेन ब्रह्मणा ऽ नेन कर्मणा ऽ नया मेन्य.. (२१) हे जलो! तुम में जो अग्नियां हैं, वे यजुर्वेद के मंत्रों के द्वारा सेवा करने योग्य एवं देवों की संगति करने वाली हैं. उन्हें मैं अपने शत्रुओं की ओर भेजता हूं. जलों की अग्नियां मुझे पुष्ट करें. इस मंत्र की शक्ति से होने वाले जादूटोने के द्वारा और जल रूपी अस्त्र के द्वारा मैं ebook converter DEMO Watermarks*