भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 540, कुल 1063 में से

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अपने शत्रुओं को नष्ट करता हूं. (२१) यदवाचीनं त्रैहायणादनृतं किं चोदिम. आपो मा तस्मात् सर्वस्माद् दुरितात् पान्त्वंहसः.. (२२) हम ने तीन वर्षों में जो झूठ बोला है, वह नवीन दुर्गति लाने वाला है. जल मुझे इस समस्त पाप से बचाएं. (२२) समुद्रं वः प्र हिणोमि स्वां योनिमपीतन. अरिष्टाः सर्वहायसो मा च नः किं चनाममत्.. (२३) हे जलो! मैं तुम्हें सागर की ओर जाने की प्रेरणा देता हूं. सागर तुम्हारा उत्पत्ति स्थान है. तुम उस में मिल जाओ. सभी ओर गति वाले तुम हिंसा समाप्त करने वाले हो. हमें कोई नष्ट न करे. (२३) अरिप्रा आपो अप रिप्रमस्मत्. प्रास्मदेनो दुरितं सुप्रतीकाः प्र दुष्वप्न्यं प्र मलं वहन्तु.. (२४) हे शत्रुओं का विनाश करने वाले जलो! हमारे शत्रुओं का विनाश करो. तुम हमारे पाप का विनाश करो एवं बुरे स्वप्न रूपी मैल को हम से दूर कर दो. (२४) विष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहा पृथिवीसंशितो ऽ ग्नितेजाः. पृथिवीमनु वि क्रमे ऽ हं पृथिव्यास्तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (२५) तू विश्व का पराक्रम एवं शत्रुओं का विनाश करने वाला है. तू पृथ्वी पर आश्रित एवं अग्नि का तेज है. मैं पृथ्वी पर विक्रम का प्रदर्शन करता हूं तथा पृथ्वी से उसे हटाता हूं. जो हम से द्वेष करता है अथवा हम जिस से द्वेष करते हैं, वह जीवित न रहे. प्राण उसे त्याग दें. (२५) विष्णोः क्रमो ऽ सि सपत्नहा ऽ न्तरिक्षसंशितो वायुतेजाः. अन्तरिक्षमनु वि क्रमे ऽ हमन्तरिक्षात् तं निर्भजामो यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः. स मा जीवीत् तं प्राणो जहातु.. (२६) तू विश्व का पराक्रम एवं शत्रुओं का विनाश करने वाला है. तू अंतरिक्ष पर आश्रित एवं विश्व का तेज है. मैं अंतरिक्ष में पराक्रम दिखाता हूं एवं उसे अंतरिक्ष से दूर भगाता हूं. जो हम से द्वेष करता है अथवा हम जिस से द्वेष करते हैं, वह जीवित न रहे. प्राण उस का त्याग कर दें. (२६) ebook converter DEMO Watermarks*