भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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देव, मनुष्य और पितर सदा जिस मणि के सहारे जीवित रहते हैं, वह मणि मुझे श्रेष्ठ स्थान पर आरोपित करे. (३२) यथा बीजमुर्वरायां कृष्टे फालेन रोहति. एवा मयि प्रजा पशवो ऽ न्नमन्नं वि रोहतु.. (३३) जिस प्रकार हल के फाल से जुती हुई उपजाऊ भूमि में बीज उगता है, उसी प्रकार मुझे पुत्र, पौत्र आदि संतान, अन्न और पशु प्राप्त हों. (३३) यस्मै त्वा यज्ञवर्धन मणे प्रत्यमुचं शिवम्. तं त्वं शतदक्षिण मणे श्रेष्ठ्याय जिन्वतात्.. (३४) हे यज्ञ बढ़ाने वाली मणि! तू कल्याणकारिणी है. मैं तुझे जिस को बांधूं, तू उस को श्रेष्ठता प्रदान कर. (३४) एतमिध्मं समाहितं जुषाणो अग्ने प्रति हर्य होमैः. तस्मिन् विदेम सुमतिं स्वस्ति प्रजां चक्षुः पशून्त्समिद्धे जातवेदसि ब्रह्मणा.. (३५) हे अग्नि! इस मणि को प्राप्त होते हुए तुम हवनों से समृद्धि प्राप्त करो. इस प्रज्वलित अग्नि में ब्रह्म ज्ञान के द्वारा उत्तम बुद्धि, कल्याण, संतान, आंखें तथा पशुओं को प्राप्त करो. (३५) सूक्त-७ देवता—स्कंभ, अध्यात्म कस्मिन्नङ्गे तपो अस्याधि तिष्ठति कस्मिन्नङ्ग ऋतमस्याध्याहितम्. क्व व्रतं क्व श्रद्ध ऽ स्य तिष्ठति कस्मिन्नङ्गे सत्यमस्य प्रतिष्ठितम्.. (१) इस मनुष्य के किस अंग में तपस्या करने की शक्ति स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य भाषण की क्षमता स्थित है? इस मनुष्य के किस अंग में व्रत अर्थात् दृढ़ निश्चय और श्रद्धा, किस अंग में स्थित रहती है? इस मनुष्य के किस अंग में सत्य प्रतिष्ठित है? (१) कस्मादङ्गाद् दीप्यते अग्निरस्य कस्मादङ्गात् पवते मातरिश्वा. कस्मादङ्गाद् वि मिमीते ऽ धि चन्द्रमा मह स्कम्भस्य मिमानो अङ्गम्.. (२) इस परमेश्वर के किस अंग से अग्नि दीप्त होती है? इस के किस अंग से वायु चलती है? चंद्रमा का निर्माण इस के किस अंग से हुआ है? वह चंद्रमा इस विश्वाधार से किस अंग को नापता है? (२) कस्मिन्नङ्गे तिष्ठति भूमिरस्य कस्मिन्नङ्गे तिष्ठत्यन्तरिक्षम्. ebook converter DEMO Watermarks*