भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 568, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 568

घी टपकाती हुई, सौभाग्यशालिनी एवं दिव्य गुणयुक्त शतौदना गौ देवों के समीप जाएगी. हे हिंसा के अयोग्य शतौदना गौ! तू अपने पालने वाले की हिंसा मत कर और स्वर्ग को जा. (११) ये देवा दिविषदो अन्तरिक्षसदश्च ये ये चेमे भूम्यामधि. तेभ्यस्त्वं धुक्ष्व सर्वदा क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१२) हे शतौदना गौ! जो देव स्वर्ग में स्थित हैं, जो अंतरिक्ष में हैं एवं जो पृथ्वी पर निवास करते हैं, तू उन के लिए सदा मीठा दूध, दही और घी प्रदान कर. (१२) यत् ते शिरो यत् ते मुखं यौ कर्णौ ये च ते हनू. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१३) हे शतौदना गौ! तेरा जो शीश, तेरा जो मुख, तेरे जो दो कान एवं तेरी ठोड़ी है—ये सब अंग तेरे दानदाता को दही, मधुर दूध एवं घी देते रहें. (१३) यौ त ओष्ठौ ये नासिके ये शृङ्गे ये च ते ऽ क्षिणी. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१४) हे शतौदना गौ! तेरे जो दोनों होंठ, तेरी नाक, तेरे जो दोनों सींग तथा जो दोनों आंखें हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मधुर दूध एवं घी देते रहें. (१४) यत् ते क्लोमा यद् हृदयं पुरीतत् सहकण्ठिका. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१५) हे शतौदना गौ! तेरा क्लोम, हृदय, मलाशय और गला तेरे दानदाता को सदा दही, मधुर दूध और घी देते रहें. (१५) यत् ते यकृद् ये मतस्ने यदान्त्रं याश्च ते गुदाः. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१६) हे शतौदना गौ! तेरा जिगर, तेरी आंतें तथा तेरी गुदा तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१६) यस्ते प्लाशिर्यो वनिष्ठुर्यौ कुक्षी यच्च चर्म ते. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१७) हे शतौदना गौ! तेरी जो तिल्ली, गुदा, दोनों आंखें और तेरा चमड़ा है, ये सब तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१७) यत् ते मज्जा यदस्थि यन्मांसं यच्च लोहितम्. ebook converter DEMO Watermarks*