भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 569, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 569

आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१८) हे शतौदना गौ! तेरी चरबी, तेरी हड्डियां, मांस और रक्त तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१८) यौ ते बाहू ये दोषण्ी यावंसौ या च ते ककुत्. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (१९) हे शतौदना गौ! तेरी दोनों भुजाएं, दोनों पिंडलियां, दोनों कंधे और ठाट तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (१९) यास्ते ग्रीवा ये स्कन्धा या: पृष्टीर्याश्च पर्शव:. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (२०) हे शतौदना गौ! तेरी जो गरदन, तेरे जो कंधे, जो पीठ और जो पसलियां हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२०) यौ त ऊरू अष्ठीवन्तौ ये श्रोणी या च ते भसत्. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (२१) हे शतौदना गौ! तेरे पैर, तेरे घुटने, तेरे कूल्हे और प्रजनन अंग सदा तेरे दानदाता को दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२१) यत् ते पुच्छं ये ते बाला यदूधो ये च ते स्तना:. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (२२) हे शतौदना गौ! तेरी जो पूंछ, तेरे जो बाल, तेरा जो ऐन एवं जो थन हैं, वे तेरे दानदाता को सदा दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२२) यास्ते जङ्घा या: कुष्ठिका ऋच्छरा ये च ते शफा:. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (२३) हे शतौदना गौ! तेरी जो जंघाएं, जो घुटने, कूल्हे और खुर हैं, वे सदा तेरे दानदाता को दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२३) यत् ते चर्म शतौदने यानि लोमान्यघ्न्ये. आमिक्षां दुहतां दात्रे क्षीरं सर्पिरथो मधु.. (२४) हे शतौदना गौ! तेरा जो चमड़ा है, हे हिंसा के अयोग्य! तेरे जो बाल हैं, वे सदा तेरे दानदाता को दही, मीठा दूध और घी देते रहें. (२४) ebook converter DEMO Watermarks*