भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 589, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 589

विराट् के रूप में कल्पित ओदन अर्थात् भात का शीश बृहस्पति और मुख ब्रह्म है. (१) द्यावापृथिवी श्रोत्रे सूर्याचन्द्रमसावक्षिणी सप्तऋषयः प्राणापानाः.. (२) द्यावा पृथिवी उस ओदन के दोनों कान, सूर्य, चंद्रमा दोनों आंखें और सात ऋषि उस के प्राण तथा अपान वायु हैं. (२) चक्षुर्मुसलं काम उलूखलम्.. (३) इस प्रकार की महिमा वाले ओदन का मूसल चक्षु और उलूखल कान हैं. (३) दितिः शूर्पमदितिः शूर्पग्राही वातो ऽ पाविनक्.. (४) असुरों की माता इस का सूप हैं, देव माता अदिति उस सूप को पकड़ने वाली हैं और वायु चावलों और भूसी का विवेचन करने वाले हैं. (४) अश्वाः कणा गावस्तण्डुला मशकास्तुषाः.. (५) ओदन संबंधी कण अश्व, चावल गाय और भूसी मशक अर्थात् मच्छर हैं. (५) कब्रु फलीकरणः शरो ऽ भ्रम्.. (६) इस ओदन का फलीकरण ही कब्रु नामक प्राणी है, जिस के सिर और भौंहों में भेद नहीं होता. आकाश में घूमता हुआ मेरु ही उस का सिर है. (६) श्याममयो ऽ स्य मांसानि लोहितमस्य लोहितम्.. (७) खनित्र अथवा फावड़े का काले रंग का लोहा इस विराट् रूप ओदन का मांस और लाल रंग का तांबा इस का रक्त है. (७) त्रपु भस्म हरितं वर्णः पुष्करमस्य गन्धः.. (८) ओदन पकाने के पश्चात होने वाली राख जस्ता है, सोना इस ओदन का रंग है और कमल इस की गंध है. (८) खलः पात्रं स्फ्यावंसावीषे अनूक्ये.. (९) खल अर्थात् खलिहान इस ओदन का पात्र तथा अनाज भरने की गाड़ी के फूले हुए भाग इस के कंधे और गाड़ी की हरसें इस ओदन के कंधों और शरीर के बीच के जोड़ है. (९) आन्त्राणि जत्रवो गुदा वरत्राः.. (१०)