अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 591, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंपकाने का पात्र है. सूर्य की धूप उसे गरम करती है. (१८) ओदनेन यज्ञवचः सर्वे लोकाः समाप्याः.. (१९) इस प्रकार महा प्रभाव से पके हुए ओदन के द्वारा यज्ञों से प्राप्त होने वाले सभी लोग पाए जा सकते हैं. (१९) यस्मिन्तसमुद्रो द्यौर्भूमिस्त्रयो ऽ वरपरं श्रिताः.. (२०) इस ओदन में सागर, द्यौ और भूमि ऊपरनीचे स्थित है. (२०) यस्य देवा अकल्पन्तोच्छिष्टे षडशीतयः.. (२१) यज्ञ से बचे हुए इस ओदन के अंश से चार सौ अस्सी देव शक्तिशाली बनें. (२१) तं त्वौदनस्य पृच्छामि यो अस्य महिमा महान्.. (२२) शिष्य ने प्रश्न किया—‘हे गुरु! मैं आप के इस ओदन की उस महिमा को पूछता हूं, जो अत्यधिक है.’ (२२) स य ओदनस्य महिमानं विद्यात्.. (२३) वह प्रसिद्ध गुरु है, जो इस ओदन की महिमा जाने. (२३) नाल्प इति ब्रूयान्नानुपसेचन इति नेदं च किं चेति.. (२४) गुरु ओदन की महिमा के उपदेश के समय महिमा की अल्पता का उपदेश न करे. वह ओदन दूध, घी, आदि से रहित है, ऐसा भी न कहे. वह ओदन सामने रखा है अथवा वह अनिर्दिष्ट है, ऐसा भी न कहे. (२४) यावद् दाता ऽ भिमनस्येत तन्नाति वदेत्.. (२५) ब्रह्मौदन सत्र यज्ञ का अनुष्ठान करने वाला मन से जितना फल पाना चाहे, गुरु उस से अधिक फल न बताए. (२५) ब्रह्मवादिनो वदन्ति पराञ्चमोदनं प्राशी ३: प्रत्यञ्चा ३ मिति.. (२६) वेद के विचारक महर्षि परस्पर कहते हैं कि हे देवदत्त! तुम ने इस ओदन को पराङ्मुख हो कर खाया है अथवा आत्माभिमुख हो कर खाया है. (२६) त्वमोदनं प्राशी३स्त्वामोदना ३ इति.. (२७) ebook converter DEMO Watermarks*