अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 618, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंदेने वाले पदार्थ, स्वर्ग और स्वर्ग में स्थित देव—ये सभी यज्ञशेष रूपी ब्रह्म से उत्पन्न हुए. (२६) देवाः पितरो मनुष्या गन्धर्वाप्सरसश्च ये. उच्छिष्टाज्जज्ञिरे सर्वे दिवि देवा दिविश्रितः.. (२७) देव, पितर, मनुष्य, गंधर्व, अप्सराएं, स्वर्ग और स्वर्ग में स्थित देव—ये सभी यज्ञ शेष रूपी ब्रह्म से उत्पन्न हुए. (२७) सूक्त-१० देवता—मन्यु यन्मन्युर्जायामावहत् संकल्पस्य गृहादधि. क आसं जन्याः के वराः क उ ज्येष्ठवरो ऽ भवत्.. (१) ब्रह्म माया के अभिमुख उसी प्रकार प्राप्त हुआ, जिस प्रकार पति पत्नी के सामने जाता है. ब्रह्म ने माया को उसी प्रकार प्राप्त किया, जिस प्रकार पति अपनी पत्नी को घर से प्राप्त करता है. ब्रह्मा की सृष्टि रचना की इच्छा में वधू पक्ष के बंधन कौन थे? कन्या का वरण करने वाले कौन थे? उस समय प्रधान वर अर्थात् विवाह करने वाला कौन था? (१) तपश्चैवास्तां कर्म चान्तर्महत्यर्णवे. त आसं जन्यास्ते वरा ब्रह्म ज्येष्ठवरो ऽ भवत्.. (२) उस सृष्टि रचना के समय सृष्टि की रचना करने वाले परमेश्वर का तप और कर्म ही उस समय स्थित थे. यह तप और कर्म प्रलय काल के सागर का मंत्र था. विवाह के मुहूर्त पर जो कन्या पक्ष वाले बंधन थे, वे ही विवाह करने वाले थे. ब्रह्म उन में सब से बड़ा वर था. (२) दश साकमजायन्त देवा देवेभ्यः पुरा. यो वै तान् विद्यात् प्रत्यक्षं स वा अद्य महद् वदेत्.. (३) अग्नि आदि देवों की उत्पत्ति से पहले ही ज्ञानेंद्रियां और कर्मेंद्रियां उत्पन्न हुईं. जो उपासक उन देवों को जान सकेगा, वह प्रत्यक्ष ही ब्रह्म का उपदेश करेगा. (३) प्राणापानौ चक्षुः श्रोत्रमक्षितिश्च क्षितिश्च या. व्यानोदानौ वाङ्मनस्ते वा आकूतिमावहन्.. (४) प्राण और अपान वायु, नयन, कान, क्षीण होने वाली क्रिया शक्ति, क्षय रहित ब्रह्म, व्यान और उदान वायुएं, वाणी और मन ने देवकृत संकल्प को धारण किया. (४) अजाता आसन्नृतवो ऽ थो धाता बृहस्पतिः. इन्द्राग्नी अश्विना तर्हि कं ते ज्येष्ठमुपासत.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*