भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 647, कुल 1063 में से

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निः क्रव्यादं नुदामसि यो अग्निर्जीवितयोपनः.. (१६) जो क्रव्याद जीवन का क्रम बिगाड़ने वाला है, उसे हम मंत्र बल से दूर भगाते हैं. हे क्रव्याद अग्नि! हम तुझे मनुष्यों, गायों और घोड़ों से दूर भगाते हैं. (१६) यस्मिन् देवा अमृजत यस्मिन् मनुष्या उत. तस्मिन् घृतस्तावौ मृष्ट्वा त्वमग्ने दिवं रुह.. (१७) हे अग्नि! जिस में देवता और मनुष्य शुद्ध होते हैं, उस में शुद्ध हो कर तू भी स्वर्ग को जा. (१७) समिद्धो अग्नं आहुत स नो माभ्यपक्रमीः. अत्रैव दीदिहि द्यवि ज्योक् च सूर्य दृशे.. (१८) हे गार्हपत्य अग्नि! तुम हमारा त्याग मत करो. तुम भलीभांति प्रदीप्त हो रही हो. तुम में आहुतियां दी जा रही हैं. तुम चिरकाल तक सूर्य के दर्शन कराने के लिए प्रदीप्त रहो. (१८) सीसे मृड्ढवं नडे मृड्ढवमग्नौ संकसुके च यत्. अथो अव्यां रामायां शीर्षक्तिमुपबर्हणे.. (१९) हे पुरुषो! तुम सिर के रोग को सीसे में, नड नाम की घास में और काली भेड़ में शुद्ध करो. (१९) सीसे मलं सादयित्वा शीर्षक्तिमुपबर्हणे. अव्यामसिकन्यां मृष्ट्वा शुद्धा भवत यज्ञियाः.. (२०) हे पुरुषो! सिर के रोग को तकिए में स्थापित करो. मल को सीसे में तथा काली भेड़ में शुद्ध कर के स्वयं शुद्ध बनो. (२०) परं मृत्यो अनु परेहि पन्थां यस्त एष इतरो देवयानात्. चक्षुष्मते शृण्वते ते ब्रवीमीहेमे वीरा बहवो भवन्तु.. (२१) हे मृत्यु! तू देवयान से भिन्न मार्ग में जा. तू दर्शन और श्रोत्र शक्तियों से युक्त है. इसलिए तू सुन ले कि हमारे बहुत से वीर पुत्र बढ़ते रहेंगे. (२१) इमे जीवा वि मृतैराववृत्रन्नभूद् भद्रा देवहूतिर्नो अद्य. प्राञ्चो अगाम नृत्यये हसाय सुवीरासो विदथमा वदेम.. (२२) ये प्राणी मृत्यु को दूर करने वाली शक्ति से युक्त हो गए. हम सुंदर वीरों से संपन्न हो कर नृत्य, गान, हास्य में रत हैं. हम यज्ञ की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि देवताओं को आहुति देना कल्याणकारी है. (२२) ebook converter DEMO Watermarks*

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