अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 648, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइमं जीवेभ्यः परिधिं दधामि मैषां नु गादपरो अर्थमेतम्. शतं जीवन्तः शरदः पुरूचीस्तिरो मृत्युं दधतां पर्वतेन.. (२३) हे मनुष्यो! तुम अपनी मृत्यु को पत्थर से दबाओ. मैं तुम्हें पत्थर रूपी कवच देता हूं. उसे कोई अन्य प्राप्त न करे. तुम सौ वर्षों तक जीवित रहो. (२३) आ रोहतायुर्जरसं वृणाना अनुपूर्वं यतमाना यति स्थ. तान् वस्त्वष्टा सुजनिमा सजोषाः सर्वमायुर्नयतु जीवनाय.. (२४) हे मनुष्यो! तुम वृद्धावस्था की दीर्घ आयु को प्राप्त करो. तुम सुंदर जन्म वाले और मान प्रीति वाले हो. त्वष्टा तुम्हें दीर्घ जीवन के हेतु पूर्ण आयु प्रदान करें. (२४) यथाहान्यनुपूर्वं भवन्ति यथर्तव ऋतुभिर्यन्ति साकम्. यथा न पूर्वमपरो जहात्येवा धातुरायूंषि कल्पयैषाम्.. (२५) जिस प्रकार ऋतुएं एक के पीछे दूसरी आती हैं, जैसे दिन एक के पीछे दूसरे आते हैं, जैसे बाद वाला पहले का त्याग नहीं करता, हे माता! उसी प्रकार प्रकार इन्हें आयुष्मान बनाओ. (२५) अश्मन्वती रीयते सं रभध्वं वीरयध्वं प्र तरता सखायः. अत्रा जहीत ये असन् दुरेवा अनमीवानुत्तरेमाभि वाजान्.. (२६) हे मनुष्यो! यह नदी पाषाणों से युक्त बह रही है. वीरतापूर्वक इस नदी के पार हो जाओ. अपने पापों को तुम इसी नदी में डाल दो. इस के बाद हम रोग निवारक वेगों को प्राप्त करें. (२६) उत्तिष्ठता प्र तरता सखायो ऽ श्मन्वती नदी स्यन्दत इयम्. अत्रा जहीत ये असन्नशिवाः शिवान्तस्योनानुत्तरेमाभि वाजान्.. (२७) हे मित्रो! हे मित्रो! उठो और तैरना आरंभ करो. पत्थरों वाली सरिता तेजी से बह रही है. जो अकल्याणकारी हैं. उन्हें हम यहीं पर त्याग दें. हम नदी को पार करके सुख देने वाले अन्नों की प्राप्ति करें. (२७) वैश्वदेवी वर्चस आ रभध्वं शुद्धा भवन्तः शुचयः पावकाः. अतिक्रामन्तो दुरिता पदानि शतं हिमाः सर्ववीरा मदेम.. (२८) हे पवित्र देवों वाली अग्नियो! तुम शुद्ध होने के समय सब देवताओं का स्तवन करो. ऋग्वेद के पदों से पापों को लांघते हुए हम सौ हेमन्तों तक पुत्रादि सहित आनंदित रहें. (२८) उदीचीनैः पथिभिर्वायुमद्भिरतिक्रामन्तो ऽ वरान् परेभिः. ebook converter DEMO Watermarks*