अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 673, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्वाण्यस्यां घोराणि सर्वे च मृत्यवः.. (२) ब्राह्मण की इस गाय में सभी विकराल कर्म और मृत्यु देने वाले कारण व्याप्त रहते है. (२) सर्वाण्यस्यां क्रूराणि सर्वे पुरुषवधाः.. (३) ब्राह्मण की इस गाय में सभी प्रकार के कूट कर्म तथा पुरुषों के सब प्रकार के वध व्याप्त रहते हैं. (३) सा ब्रह्मज्यं देवपीयुं ब्रह्मगव्या दीयमाना मृत्योः पड्वीश आ द्यति.. (४) ब्राह्मण से छीनी हुई इस प्रकार की यह गाय ब्राह्मणत्व को अपमानित करने वाले मनुष्य को मृत्यु के बंधन में बांध देती है. (४) मेनिः शतवधा हि सा ब्रह्मज्यस्य क्षितिर्हि सा.. (५) जो मनुष्य ब्राह्मण की आयु क्षीण करता है. उस को क्षीण करने वाली यह गौ सैकड़ों प्रकार के संहारक अस्त्रों के समान बन जाती है. (५) तस्माद् वै ब्राह्मणानां गौर्दुराधर्षा विजानता.. (६) इसलिए ब्राह्मण की धेनु को विद्वान् पुरुष सैकड़ों का वध करने वाली के रूप में जाने. (६) वज्रो धावन्ती वैश्वानर उद्दीता.. (७) ब्राह्मण की गाय वज्र के समान दौड़ती है तथा अग्नि के समान ऊपर उठती है. (७) हेतिः शफानुत्खिदन्ती महादेवो ३ पेक्षमाणा.. (८) खुरों का शब्द करती हुई ब्राह्मण की गाय महादेव के आयुध के रूप में बन जाती है. (८) क्षुरपविरीक्षमाणा वाश्यमानाभि स्फूर्जति.. (९) रंभाती हुई ब्राह्मण की गाय के खुर वज्र के समान होते हैं. (९) मृत्युर्हिङ्कृण्वत्यु १ ग्रो देवः पुच्छं पर्यस्यन्ती.. (१०) हुंकार का शब्द करती हुई ब्राह्मण की गाय मृत्यु के समान होती हैं. सभी ओर पूंछ को घुमाती हुई यह गाय उग्र रूप वाली हो जाती है. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*