अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 674, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्वज्यानिः कर्णौ वरीवर्जयन्ती राजयक्ष्मो मेहन्ती.. (११) सभी प्रकार से आयु को क्षीण करने वाली यह गौ कानों को हिलाती है. यह गौ अपने मूत्र को त्यागती हुई क्षय अर्थात् विनाश को उत्पन्न करने वाली हो जाती है. (११) मेनिर्दुह्यमाना शीर्षक्तिर्दुग्धा.. (१२) यह गौ जब दुही जाती है तब यह अस्त्र के समान होती है. तब दुही जाने के बाद सिर दर्द स्वरूपा बन जाती है. (१२) सेदिरुपतिष्ठन्ती मिथोधः परामृष्टा.. (१३) यह गाय स्पर्श करने पर आपस में युद्ध कराती है तथा समीप खड़ी होने पर विदीर्ण अर्थात् टुकड़े-टुकड़े कर देती है. (१३) शरव्या ३ मुखे ऽ पिनह्यमान ऋतिर्हन्यमाना.. (१४) यह गाय पीटने पर दुर्गति प्रदान करती है तथा ढकने पर विनाश करने वाली होती है. (१४) अघविषा निपतन्ती तमो निपतिता.. (१५) यह गाय बैठती हुई भयानक विष के समान तथा बैठ जाने पर साक्षात मृत्युरूपी अंधकार के समान हो जाती है. (१५) अनुगच्छन्ती प्राणानुप दासयति ब्रह्मगवी ब्रह्मज्यस्य.. (१६) ब्राह्मण की यह गाय ब्राह्मण को हानि पहुंचाने वाले के पीछे चलती हुई उस के प्राणों का विनाश करती है. (१६) सूक्त-८ देवता—ब्रह्मगवी वैरं विकृत्यमाना पौत्राद्यं विभाज्यमाना.. (१) यह ब्राह्मण की अपहृत अर्थात् चुराई हुई गाय है. यह पुत्र, पौत्र आदि का बंटवारा कर उन का विनाश करने वाली है. (१) देवहेतिह्रियमाणा वृद्धिर्हृता.. (२) ब्राह्मणों की यह गाय हरण करते समय अर्थात् चुराते समय अस्त्र रूप है और चुराने के बाद चुराने वाले को क्षीण करने वाली होती है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*