भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 692, कुल 1063 में से

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उद् केतुना बृहता देव आगन्नापावृक् तमो ऽ भि ज्योतिरश्रैत्. दिव्यः सुपर्णः स वीरो व्यख्यददितेः पुत्रो भुवनानि विश्वा.. (९) सूर्य देव महान प्रकाश के साथ उदय को प्राप्त हुए हैं. उन्होंने अंधकार को दूर कर के तेज का आश्रय लिया है. अदिति के वीर पुत्र आदित्य अर्थात् सूर्य दिव्य प्रकाश वाले हैं. उन्होंने ही भुवनों को प्रकाशित किया है. (९) उद्यन् रश्मीना तनुषे विश्वा रूपाणि पुष्यसि. उभा समुद्रौ क्रतुना वि भासि सर्वॉल्लोकान् परिभूभ्राजमानः.. (१०) हे सूर्य देव! तुम उदय होने के बाद अपनी किरणों का विस्तार करते हो. तुम्हारे उदय होने पर सागर पर्यंत धरती पर यज्ञ कर्म आरंभ होते हैं. तुम गति करते हुए दोनों सागरों तथा समस्त लोकों को प्रकाशित करते हो. (१०) पूर्वापरं चरतो माययैतौ शिशू क्रीडन्तौ परि यातो ऽ र्णवम्. विश्वान्यो भुवना विचष्टे हैरण्यैरन्यं हरितो वहन्ति.. (११) सूर्य और चंद्र दोनों बालकों के समान क्रीड़ा करते हुए अपनी शक्ति से ही आगेपीछे चलते हैं और भ्रमण करते हुए सागर तक पहुंच जाते हैं. इन दोनों में एक अर्थात् चंद्र सभी भुवनों को प्रकाशित करता है और दूसरा अर्थात सूर्य सभी ऋतुओं का निर्माण करता हुआ सभी को नवीनता प्रदान करता है. (११) दिवि त्वात्रिरधारयत् सूर्या मासाय कर्तवे. स एषि सुधृतस्तपन् विश्वा भूतावचाकशत्.. (१२) हे सूर्य देव! दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों से मुक्त होने वाले अत्रि ऋषि ने तुम्हें महीनों को बनाने के लिए आकाश में स्थापित किया है. तुम वहीं रहो और तपते हुए आकर सभी प्राणियों को प्रकाशित करते रहो. (१२) उभावन्तौ समर्धसि वत्सः संमातराविव. नन्वे ३ तदितः पुरा ब्रह्म देवा अमी विदुः.. (१३) बालक जिस प्रकार कुशलतापूर्वक अपने पिता और माता के पास सरलता से पहुंच जाता है, उसी प्रकार तुम दोनों सागरों के समीप पहुंच जाते हो. यह निश्चय है कि इस से पहले ही देवगण ब्रह्म को जानते हैं. (१३) यत् समुद्रमनु श्रितं तत् सिषासति सूर्यः. अध्वास्य विततो महान् पूर्वश्चापरश्च यः.. (१४) समुद्र में जो भी रत्न आदि हैं उन्हें सूर्य देव प्राप्त करते हैं. सूर्य का पूर्व से पश्चिम तक ebook converter DEMO Watermarks*