भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 693, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 693

का मार्ग विशाल है. (१४) तं समाप्नोति जूतिभिस्ततो नापचिकित्सति. तेनामृतस्य भक्षं देवानां नाव रुन्धते.. (१५) हे सूर्य देव! तुम शीघ्र चलने वाले अश्वों की सहायता से उस मार्ग को शीघ्र प्राप्त कर लेते हो. तुम अपना मन इधरउधर नहीं होने देते, इस कारण तुम को अमृत अन्न का भाग नियमित रूप से प्राप्त होता है. (१५) उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्.. (१६) सूर्य देव की किरणें विश्व को प्रभावित करने के लिए निकलती हैं. सभी को जानने वाले सूर्य के दर्शन सब जन कर सकें, इस हेतु उन की रश्मियां ऊपर उठती हैं. (१६) अप त्ये तायवो यथा नक्षत्रा यन्त्यक्तुभिः. सूराय विश्वचक्षसे.. (१७) रात्रि की समाप्ति पर जिस प्रकार चोर भाग जाता है, उसी प्रकार सूर्य को देख कर रात्रि के साथसाथ सब तारे भाग जाते हैं. (१७) अदृश्रन्नस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ अनु. भ्राजन्तो अग्नयो यथा.. (१८) सूर्य देव की किरणें अग्नि के समान चमकती हैं और सभी को प्रकाश देती हैं. (१८) तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कृदसि सूर्य. विश्वमा भासि रोचन.. (१९) हे सूर्य देव! तुम नौका के समान सब के तारक, सब को देखने वाले, ज्योति प्रदान करने वाले तथा सब को प्रकाशमय करने वाले हो. (१९) प्रत्यङ् देवानां विशः प्रत्यङ्ङुदेषि मानुषीः. प्रत्यङ् विश्वं स्व दृशे.. (२०) हे सूर्य देव! तुम सभी मानवी और दिव्य प्रजाओं के सामने प्रकट होते हो. तुम सभी को देखने के लिए प्रत्यक्ष रूप से उदय होते हो. (२०) येना पावक चक्षसा भुरण्यन्तं जनाँ अनु. त्वं वरुण पश्यसि.. (२१) हे पाप नाशक सूर्य! जिस दृष्टि से तुम सब का भरणपोषण करने वाले मनुष्य को देखते हो, उसी दृष्टि से हमें भी देखो. (२१) वि द्यामेषि रजस्पृथ्वहर्मीमानो अक्तुभिः. पश्यन् जन्मानि सूर्य.. (२२) हे सूर्य देव! तुम सभी जीवों को कृपा दृष्टि से देखते हुए तथा रात्रि और दिन का निर्माण करते हुए इन आकाश, पृथ्वी और अंतरिक्ष में अनेक प्रकार से भ्रमण करते हो. (२२) ebook converter DEMO Watermarks*