भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 713, कुल 1063 में से

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नामक वायु रखी है. अपने पति के पास जाने वाली सूर्या इस मनोमय रथ पर चढ़ती है. (१२) सूर्याया वहतुः प्रागात् सविता यमवासृजत्. मघासु हन्यन्ते गावः फल्गुनीषु व्यु ह्यते.. (१३) सविता देव ने जिस को भेजा था, सूर्या का वह दहेज आगे गया है. मघा नक्षत्र में गाएं भेजी जाती हैं और फाल्गुनी नक्षत्रों में विवाह होता है. (१३) यदश्विना पृच्छमानावयातं त्रिचक्रेण वहतुं सूर्यायाः. क्वैकं चक्रं वामासीत् क्व देष्ट्राय तस्थथुः.. (१४) हे अश्विनीकुमारो! जब तुम सूर्या का दहेज ले कर चले, उस समय तुम देवों को पूछते हुए तीन पहियों वाले रथ के सहारे चले. तुम्हारा वह कर्म सब देवों को रुचिकर प्रतीत हुआ. पूषा ने तुम्हें इस प्रकार स्वीकार किया जैसे पुत्र पिता को स्वीकार करता है. (१४) यदयातं शुभस्पती वरेयं सूर्यामुप. विश्वे देवा अनु तद् वामजानन् पुत्रः पितरमवृणीत पूषा.. (१५) हे सूर्या! तेरे रथ के दोनों चक्रों को ज्ञानीजन ऋतु के अनुसार जानते हैं. तेरे रथ का जो एक चक्र गुप्त है, उसे विशेष ज्ञानी ही जानते हैं. (१५) द्वे ते चक्रे सूर्ये ब्रह्माण ऋतुथा विदुः. अथैकं चक्रं यद् गुहा तदद्धातय इद् विदुः.. (१६) हे शुभ करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम दोनों जब वर के द्वारा पूछने योग्य सूर्य के समीप गए, तुम्हारे उसे कर्म को सभी देवों ने सराहा. पूषा ने तुम्हें उसी प्रकार स्वीकार किया जिस प्रकार पुत्र पिता को स्वीकार करता है. (१६) अर्यमणं यजामहे सुबन्धुं पतिवेदनम्. उर्वारुकमिव बन्धनात् प्रेतो मुञ्चामि नामुतः.. (१७) अच्छे बंधुबांधवों से युक्त पति का ज्ञान देने वाले तथा श्रेष्ठ मनवाले हम तेरा सत्कार करते हैं. खरबूजा जिस प्रकार अपनी बेल से छूट जाता है, उसी प्रकार मैं तुझे तेरे पितृकुल से छुड़ाता हूं, मैं तुझे पतिकुल से अलग नहीं करता. (१७) प्रेतो मुञ्चामि नामुतः सुबद्धाममुतस्करम्. यथेयमिन्द्र मीढ्वः सुपुत्रा सुभगासति.. (१८) मैं तुझे तेरे पितृकुल से मुक्त करता हूं, पतिकुल से नहीं. पतिकुल से तो मैं तुझे भलीभांति बांधता हूं. हे दाता इंद्र! ऐसी कृपा करो कि यह वधू उत्तम पुत्रों वाली तथा