अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंरहे हो?” (१) सो ऽ ब्रवीदासन्दीं मे सं भरन्त्विति.. (२) उस ने उत्तर दिया— “मेरे लिए आसंदी और बैठने की चौकी बनाओ.” (२) तस्मै व्रात्यायासन्दीं समभरन्.. (३) तब देवताओं ने उस के लिए आसंदी बनाई. (३) तस्या ग्रीष्मश्च वसन्तश्च द्वौ पादावास्तां शरच्च वर्षाश्च द्वौ.. (४) उस के दो पाए ग्रीष्म और वसंत ऋतुएं तथा शेष दो पाए शरद और वर्षा नामक ऋतुएं हुईं. (४) बृहच्च रथन्तरं चानूच्ये ३ आस्तां यज्ञायज्ञियं च वामदेव्यं च तिरश्च्ये.. (५) बृहत् और रथंतर उस चौकी के बाजू अर्थात् अगलबगल के फलक या तख्ते थे. यज्ञायज्ञिय और वामदेव्य उस के तिरछे फलक अर्थात् तख्ते थे. (५) ऋचः प्राञ्चस्तन्तवो यजूंषि तिर्यञ्चः.. (६) ऋग्वेद के मंत्र उसे बुनने के लिए लंबाई के तंतु और यजुर्वेद के मंत्र तिरछे तंतु थे. (६) वेद आस्तरणं ब्रह्मोपबर्हणम्.. (७) वेद उस का बिछौना था और ब्रह्म उस के ओढ़ने का वस्त्र था. (७) सामासाद उद्गीथो ऽ पश्रयः.. (८) सामवेद के मंत्र उस का गद्दा था और उद्गीथ उस का तकिया था. (८) तामासन्दीं व्रात्य आरोहत्.. (९) व्रात्य इस प्रकार की ज्ञानमयी चौकी पर चढ़ा. (९) तस्य देवजनाः परिष्कन्दा आसन्संकल्पाः प्रहाख्या ३ विश्वानि भूतान्युपसदः.. (१०) संकल्प उस के दूत बने तथा सभी प्राणी उस के साथ बैठने वाले हुए. (१०) विश्वान्येवास्य भूतान्युपसदो भवन्ति य एवं वेद.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*