भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 741, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 741

शारदौ मासौ गोप्तारावकुर्वञ्छ्यैतं च नौधसं चानुष्ठातारौ.. (११) देवताओं ने उत्तर दिशा की ओर से शरद ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक नियुक्त किया तथा श्येत और नौधस को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (१०-११) शारदावेनं मासावुदीच्या दिशो गोपायतः श्यैतं च नौधसं चानु तिष्ठतो य एवं वेद.. (१२) जो यह बात जानता है, उत्तर दिशा की ओर से उस की रक्षा शरद ऋतु के दो महीने करते हैं तथा नौधस और श्येत उस के अनुकूल बन जाते हैं. (१२) तस्मै ध्रुवाया दिशः.. (१३) हैमनौ मासौ गोप्तारावकुर्वन् भूमिं चाग्निं चानुष्ठातारौ.. (१४) देवताओं ने ध्रुव दिशा अर्थात् पृथ्वी की अथवा नीचे की ओर से हेमंत ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक नियुक्त किया तथा पृथ्वी और अग्नि को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (१३-१४) हैमनावेनं मासौ ध्रुवाया दिशो गोपायतो भूमिश्चाग्निश्चानु तिष्ठतो य एवं वेद.. (१५) जो इस बात को जानता है, ध्रुव दिशा की ओर से हेमंत ऋतु के दो महीने उस पुरुष की रक्षा करते हैं. पृथ्वी और अग्नि उस के अनुकूल हो जाते हैं. (१५) तस्मा ऊर्ध्वाया दिशः.. (१६) शैशिरौ मासौ गोप्तारावकुर्वन् दिवं चादित्यं चानुष्ठातारौ... (१७) देवताओं ने ऊर्ध्व दिशा अर्थात् ऊपर की ओर से शिशिर ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक नियुक्त किया और आकाश तथा सूर्य को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया. (१६-१७) शैशिरावेनं मासावूर्ध्वाया दिशो गोपायतो द्यौश्चादित्यश्चानु तिष्ठतो य एवं वेद.. (१८) जो इस बात को जानता है. वह ऊपर की दिशा की ओर से शिशिर ऋतु के दो महीनों के द्वारा रक्षित होता है. आकाश तथा सूर्य उस के अनुकूल हो जाते हैं. (१८) सूक्त-५ देवता—रुद्र तस्मै प्राच्या दिशो अन्तर्देशाद् भवमिष्वासमनुष्ठातारमकुर्वन्.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*