अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 745, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंस उत्तमां दिशमनु व्यचलत्.. (७) वह उत्तर दिशा की ओर चला. (७) तमृचश्च सामानि च यजूंषि च ब्रह्म चानुव्यचलन्.. (८) साम, यजु, ऋचाएं और ब्रह्म उस के पीछे चले. (८) ऋचां च वै स साम्नां च यजुषां च ब्रह्मणश्च प्रियं धाम भवति य एवं वेद.. (९) जो इस बात को जानता है, वह साम, यजु, ऋचा और ब्रह्म का प्रिय धाम होता है. (९) स बृहतीं दिशमनु व्यचलत्.. (१०) उस ने बृहती दिशा में गमन किया. (१०) तमितिहासश्च पुराणं च गाथाश्च नाराशंसीश्चानुव्य चलन्.. (११) पुराण, इतिहास तथा मनुष्यों की प्रशंसात्मक गाथाएं उस के पीछेपीछे चलीं. (११) इतिहासस्य च वै स पुराणस्य च गाथानां च नाराशंसीनां च प्रियं धाम भवति य एवं वेद.. (१२) इस बात को जो जानता है, वह पुराण, इतिहास तथा गाथाओं का प्रिय धाम बनता है. (१२) स परमां दिशमनु व्यचलत्.. (१३) उस ने परम दिशा की ओर प्रस्थान किया. (१३) तमाहवनीयश्च गार्हपत्यश्च दक्षिणाग्निश्च यज्ञश्च यजमानश्च पशवश्चानुव्य चलन्.. (१४) आहवनीय, गार्हपत्य तथा दक्षिण अग्नियां उस के पीछेपीछे चलीं. (१४) आहवनीयस्य च वै स गार्हपत्यस्य च दक्षिणाग्नेश्च यज्ञस्य च यजमानस्य च पशूनां च प्रियं धाम भवति य एवं वेद.. (१५) जो इस बात को जानता है, आहवनीय, गार्हपत्य और दक्षिण नाम की अग्नियों का वह प्रिय धाम बनता है. (१५) सो ऽ नादिष्टां दिशमनु व्यचलत्.. (१६) ebook converter DEMO Watermarks*