भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 756, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 756

इस बात को जानने वाला पुरुष अन्नाद ब्रह्म के द्वारा अन्न का भोजन करता है. (२४) सूक्त-१५ देवता—अध्यात्म, व्रात्य तस्य व्रात्यस्य.. (१) सप्त प्राणाः सप्तापानाः सप्त व्यानाः.. (२) इस व्रात्य के सात प्राण, सात अपान तथा सात ही व्यान हैं. (१-२) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य प्रथमः प्राण ऊर्ध्वो नामायं सो अग्निः.. (३) इस वात्य का पहला ऊर्ध्व प्राण अग्नि है. (३) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य द्वितीयः प्राणः प्रौढो नामासौ स आदित्यः.. (४) इस व्रात्य का द्वितीय प्रौढ़ प्राण आदित्य है. (४) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्व तृतीयाः प्राणो ३ व्यू ढो नामासौ स चन्द्रमाः.. (५) इस का जो तृतीय प्राण है, वह अव्यूढ़ नाम का चंद्रमा है. (५) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्व चतुर्थः प्राणो विभूर्नामायं स पवमानः.. (६) इस का चतुर्थ प्राण विभु पवमान है. (६) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य पञ्चमः प्राणो योनिनार्म ता इमा आपः.. (७) इस व्रात्य का पांचवां प्राण योनि जल है. (७) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य षष्ठः प्राणः प्रियो नाम त इमे पशवः.. (८) इस का छठा प्राण प्रिय नाम वाला पशु है (८) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य सप्तमः प्राणो ऽपरिमितो नाम ता इमाः प्रजाः.. (९) इस के सप्तम प्राण का नाम अपरिमित है. यह प्रजा है. (९) सूक्त-१६ देवता—अध्यात्म, व्रात्य तस्य व्रात्यस्य. यो ऽस्य प्रथमो ऽपानः सा पौर्णमासी.. (१)