अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 757, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस व्रात्य का प्रथम अपान पूर्णमासी है. (१) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य द्वितीयो ऽ पानः साष्टका (२) इस का द्वितीय अपान अष्टकार है. (२) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य तृतीयो ऽ पानः सामावास्या.. (३) इस का तृतीय अपान अमावस्या है. (३) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य चतुर्थो ऽ पानः सा श्रद्धा.. (४) इस का चतुर्थ अपान श्रद्धा है. (४) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य पञ्चमो ऽ पानः सा दीक्षा.. (५) इस का पांचवां अपान दीक्षा है. (५) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य षष्ठो ऽ पानः स यज्ञः.. (६) इस का छठा अपान यज्ञ है. (६) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य सप्तमो ऽ पानस्ता इमा दक्षिणाः.. (७) इस का सप्तम अपान दक्षिणा है. (७) सूक्त-१७ देवता—अध्यात्म, व्रात्य तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य प्रथमो व्यानः सेयं भूमिः.. (१) इस व्रात्य का प्रथम व्यान भूमि है. (१) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य द्वितीयो व्यानस्तदन्तरिक्षम्.. (२) इस का द्वितीय व्यान अंतरिक्ष है. (२) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य तृतीयो व्यानः सा द्यौः.. (३) इस का तृतीय व्यान द्यौ है. (३) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य चतुर्थो व्यानस्तानि नक्षत्राणि.. (४) इस का चतुर्थ व्यान नक्षत्र है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*