भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 758

तस्य व्रात्यस्य. योऽस्य पञ्चमो व्यानस्त ऋतवः.. (५) इस का पांचवां व्यान ऋतु हैं. (५) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य षष्ठो व्यानस्त आर्तवाः.. (६) इस का छठा व्यान आर्तव है. (६) तस्य व्रात्यस्य. यो ऽ स्य सप्तमो व्यानः स संवत्सरः.. (७) इस का सातवां व्यान संवत्सर है. (७) तस्य व्रात्यस्य. समानमर्थं परि यन्ति देवाः संवत्सरं वा एतदृतवो ऽ नुपरियन्ति व्रात्यं च.. (८) देवगण इस के समान अर्थ को प्राप्त होते तथा संवत्सर और ऋतुएं भी इस का अनुमान करते हैं. (८) तस्य व्रात्यस्य. यदादित्यमभिसंविशन्त्यमावास्यां चैव तत् पौर्णमासीं च.. (९) तस्य व्रात्यस्य. एकं तदेषाममृतमित्याहुतिरेव.. (१०) अमावस्या और पूर्णिमा आदित्य में प्रवेश करती हैं. आहुति ही इन का अविनाशी होना है. (९-१०) सूक्त-१८ देवता—अध्यात्म, व्रात्य तस्य व्रात्यस्य.. (१) इस व्रात्य का दक्षिण चक्षु आदित्य है. (१) यदस्य दक्षिणमक्ष्यसौ स आदित्यो यदस्य सव्यमक्ष्यसौ स चन्द्रमाः.. (२) इस का वाम चक्षु चंद्रमा है. (२) यो ऽ स्य दक्षिणः कर्णो ऽ यं सो अग्निर्यो ऽ स्य सव्यः कर्णो ऽ यं स पवमानः.. (३) इस का दाहिना कान अग्नि और बायां कान पवमान है. (३) अहोरात्रे नासिके दितिश्चदितिश्च शीर्षकपाले संवत्सरः शिरः.. (४)