भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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जल हमारे पाप को हमसे दूर करे. पाप हमे अलग हों. (१०) प्रास्मदेनो वहन्तु प्र दुःष्वप्न्यं वहन्तु.. (११) यह जल हमारे पाप और बुरे स्वप्न को बहा कर ले जाए. (११) शिवेन मा चक्षुषा पश्यतापः शिवया तन्वोप स्पृशत त्वचं मे.. (१२) हे जल! तुम मुझे कृपा की दृष्टि से देखो और अपने कल्याणकारक भाग से मेरी त्वचा का स्पर्श करो. (१२) शिवानग्नीनप्सुषदो हवामहे मयि क्षत्रं वर्च आ धत्त देवी:.. (१३) हम जल में व्याप्त और मंगलकारिणी अग्नियों को बुलाते हैं. यह जल मुझे क्षमाबल वाली शक्ति से संपन्न करे. (१३) सूक्त-२ देवता—प्रजापति निर्दुर्मण्य ऊर्जा मधुमती वाक्.. (१) मैं दूषित चर्मरोग से मुक्त रहूं. मेरी वाणी शक्तिशालिनी तथा मधुयुक्त हो. (१) मधुमती स्थ मधुमतीं वाचमुदेयम्.. (२) हे ओषधियो! तुम मधुरस से पूर्ण रहो. मेरी वाणी भी मधुररस से पूर्ण हो. (२) उपहूतो मे गोपा उपहूतो गोपीथ:.. (३) मेरे कान कल्याण करने वाली बातें सुनें. मैं मंगलपूर्ण एवं प्रशंसाभरी बातें सुनूं. (३) सुश्रुतौ कर्णौ भद्रश्रुतौ कर्णौ भद्रं श्लोकं श्रूयासम्.. (४) मेरे कान भलीभांति तथा निकट से सुनना कभी न छोड़ें. मेरे नेत्र गरुड़ के समान हों तथा सदैव देखने की शक्ति से सम्पन्न रहें. (४) सुश्रुतिश्च मोपश्रुतिश्च मा हासिष्टां सौपर्णं चक्षुरजस्रं ज्योति:.. (५) मेरे कान ठीक से सुनना और पास से सुनना न छोड़ें. मेरी आंखें गरुड़ की देखने की शक्ति से पूर्ण रहें. (५) ऋषीणां प्रस्तरो ऽ सि नमो ऽ स्तु दैवाय प्रस्तराय.. (६) eBook converter DEMO Watermarks*