भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 778

सत्रहवां कांड सूक्त-१ देवता—आदित्य विषासहिं सहमानं सासहानं सहीयांसम्. सहमानं सहोजितं स्वर्जितं गोजितं संधनाजितम्. ईड्यं नाम ह्व इन्द्रमायुष्मान् भूयासम्. (१) सहमान अर्थात् दूसरों को दबाने वाले तेज से युक्त, शत्रुओं के उस तेज को जीतने वाले, स्वर्ग के विजेता, शत्रुओं के गाय आदि पशुओं को जीतने वाले तथा जलों पर विजय प्राप्त करने वाले इंद्र रूप सूर्य को मैं प्रातः, मध्याह्न तक संध्या के कर्मों के द्वारा बुलाता हूं. उन इंद्र रूप सूर्य की कृपा से मैं अधिक आयु वाला बनूं. (१) विषासहिं सहमानं सासहानं सहीयांसम्. सहमानं सहोजितं स्वर्जितं गोजितं संधनाजितम्. ईड्यं नाम ह्व इन्द्रं प्रियो देवानां भूयासम् (२) सहमान अर्थात् दूसरों को दबाने वाले तेज से युक्त, शत्रुओं के उस तेज को जीतने वाले, स्वर्ग के विजेता, शत्रुओं के गाय आदि पशुओं को जीतने वाले तथा जलों पर विजय प्राप्त करने वाले इंद्र रूप सूर्य को बुलाता हूं. उन इंद्र की कृपा से मैं संतान आदि का प्रिय बनूं. (२) विषासहिं सहमानं सासहानं सहीयांसम्. सहमानं सहोजितं स्वर्जितं गोजितं संधनाजितम्. ईड्यं नाम ह्व इन्द्रं प्रियः प्रजानां भूयासम् (३) मैं सहमान अर्थात् दूसरों को दबाने वाले तेज से युक्त, शत्रुओं के उस तेज को जीतने वाले, स्वर्ग के विजेता, शत्रुओं के गाय आदि पशुओं को जीतने वाले तथा जलों पर विजय प्राप्त करने वाले इंद्र रूप सूर्य को मैं बुलाता हूं. उन इंद्र रूप सूर्य की कृपा से मैं प्रजाओं का प्रिय बनूं. (३) विषासहिं सहमानं सासहानं सहीयांसम्. सहमानं सहोजितं स्वर्जितं गोजितं संधनाजितम्. ईड्यं नाम ह्व इन्द्रं प्रियः पशूनां भूयासम् (४) सहमान अर्थात् दूसरों को दबाने वाले तेज से युक्त, शत्रुओं के उस तेज को जीतने वाले, ebook converter DEMO Watermarks*