भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 783

शुक्रो ऽ सि भ्राजो ऽ सि. स यथा त्वं भ्राजता भ्राजो ऽ स्येवाहं भ्राजता भ्राज्यासम्.. (२०) हे सूर्य! तुम शुक्ल अर्थात् अत्यधिक उज्ज्वल हो तथा तुम दीप्तिशाली हो. तुम जिस प्रकार की ज्योति से पूर्ण रहते हो, मैं तुम्हारे उसी ज्योति पूर्ण भाव की उपासना करता हूं. (२०) रुचिरसि रोचो ऽ सि. स यथा त्वं रुच्या रोचो ऽ स्येवाहं पशुभिश्च ब्राह्मणवर्चसेन च रुचिषीय.. (२१) हे सूर्य! तुम दीप्ति रूप हो तथा दूसरों को दीप्ति वाला बनाते हो. तुम जिस प्रकार दीप्ति से दीप्ति मग्न हो, उसी प्रकार मैं पशुओं तथा ब्राह्मणोचित तेज से संपन्न बनूं. (२१) उद्यते नम उदयते नम उदिताय नमः. विराजे नमः स्वराजे नमःसम्राजे नमः.. (२२) हे सूर्य! उदय होते हुए तुम को नमस्कार है तथा उदय के पश्चात ऊपर उठते हुए तुम को नमस्कार है. हे विराट् रूप वाले सूर्य! तुम को नमस्कार है! स्वयं प्रकाशित होने वाले तुम को नमस्कार है. अतिशय रूप से प्रकाशित होने वाले तुम को नमस्कार है. (२२) अस्तंयते नमो ऽ स्तमेष्यते नमो ऽ स्तमिताय नमः. विराजे नमः स्वराजे नमः सम्राजे नमः.. (२३) अस्त होने वाले, अस्त हो रहे और अस्त हो चुके सूर्य देव को मेरा नमस्कार है. विशेष तेजवान को नमस्कार है, शोभनीय तेज वाले को नमस्कार है तथा उत्तम तेज वाले को नमस्कार है. (२३) उदगादयमादित्यो विश्वेन तपसा सह. सपत्नान् मह्यं रन्धयन् मा चाहं द्विषते रधं तवेद् विष्णो बहुधा वीर्याणि. त्वं नः पृणीहि पशुभिर्विश्वरूपैः सुधायां मा धेहि परमे व्योमन्.. (२४) यह सूर्य पूर्ण विश्व को संतप्त करने वाली किरणों के साथ उदय हुए हैं. ये मेरे शत्रुओं को मेरे वश में करते हैं तथा मुझे किसी शत्रु के वशीभूत नहीं बनाते. हे व्यापक सूर्य! तुम्हारी ही शक्तियां अनंत हैं. तुम मुझे गाय, भैंस आदि सभी पशुओं से पूर्ण करो और परम व्योम में जो सुधा है, उस में मुझे स्थित करो. (२४) आदित्य नावमारुक्षः शतारित्रां स्वस्तये. अहर्मत्यपीपरो रात्रिं सत्राति पारय.. (२५) ebook converter DEMO Watermarks*