भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 786, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 786

अठारहवां कांड सूक्त-१ देवता—मंत्रों में कहे गए ओ चित् सखायं सख्या ववृत्यां तिरः पुरू चिदर्णवं जगन्वान्. पितुर्नपातमा दधीत वेधा अधि क्षमि प्रतरं दीध्यानः.. (१) यमी का कथन—मैं समान प्रसिद्धि वाले मित्र यम को आदर भाव के अनुकूल बनाती हूं. समुद्र तट के समीप वाले द्वीप में चलते हुए यम अपने पुत्र को मुझ में स्थापित करें. हे यम! तुम्हारी प्रसिद्धि सभी लोकों में है. तुम सदा तेज से दीप्त रहो. (१) न ते सखा सख्यं वष्ट्येतत् सलक्ष्मा यद् विषुरूपा भवाति. महस्पुत्रासो असुरस्य वीरा दिवो धर्तार उर्विया परि ख्यन्.. (२) यम का कथन—मैं तेरा सोदर अर्थात् एक ही पेट से उत्पन्न हुआ तेरा मित्र हूं. पर मैं भाई और बहन के समागम संबंधी मित्र भाव की इच्छा नहीं करता हूं. तू एक उदर से उत्पन्न हो कर भी मेरी पत्नी बनने की कामना करती है. मैं ऐसे मित्रभाव को स्वीकार नहीं करता हूं. शत्रुओं को दबाने वाले महाबली रुद्र के पुत्र मरुद्गण भी इस की निंदा करेंगे. (२) उशन्ति घा ते अमृतास एतदेकस्य चित् त्यजसं मर्त्यस्य. नि ते मनो मनसि धाय्यस्मे जन्युः पतिस्तन्व१मा विविश्याः.. (३) यमी—हे यम! मरुद्गण उस मार्ग की इच्छा करते हैं, जिस का मैं ने तुम से निवेदन किया है. इसलिए तुम अपने मन को मेरी ओर लगाओ. फिर तुम संतान को उत्पन्न करने वाले मेरे पति बनते हुए भाई के भाव को छोड़ कर मुझ में प्रविष्ट हो जाओ. (३) न यत् पुरा चकृमा कद्ध नूनमृतं वदन्तो अनृतं रपेम. गन्धर्वो अप्स्वप्या च योषा सा नौ नाभिः परमं जामि तन्नौ.. (४) यम—हे यमी! असत्य बात को हम सत्य भाषण करने वाले किस प्रकार सत्य कहें? जल को धारण करने वाले सूर्य भी आकाश में अपनी पत्नी के सहित स्थित हैं. इसलिए एक ही माता और पिता वाले हम दोनों उन्हीं के सामने तेरी इच्छा पूर्ण करने में समर्थ न होंगे. (४) गर्भे नु नौ जनिता दम्पति कद्देवस्त्वष्टा सविता विश्वरूपः. नकिरस्य प्र मिनन्ति व्रतानि वेद नावस्य पृथिवी उत द्यौः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*