भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 798, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 798

सौंप दे. जब इस के प्राण निकल जाते हैं, तब यह प्रेत देवों के वश में हो जाता है. (५) त्रिकद्रुकेभिः पवते षडुर्वीरिकमिद् बृहत्. त्रिष्टुब् गायत्री छन्दांसि सर्वा ता यम आर्पिता.. (६) यह सब का नियंत्रण करने वाला तथा महान यम कद्रुक नाम के तीन यंत्रों से छह उर्वियों को प्राप्त होता है. त्रिष्टुप, गायत्री आदि छंद सब का नियंत्रण करने वाले परमात्मा में स्थित हैं. (६) सूर्य चक्षुषा गच्छ वातमात्मना दिवं च गच्छ पृथिवीं च धर्मभिः. अपो वा गच्छ यदि तत्र ते हितमोषधीषु प्रति तिष्ठा शरीरैः.. (७) हे प्रेत! तू नेत्र द्वार से सूर्य को प्राप्त हो. तू आत्मा के द्वारा वायु को प्राप्त हो तथा वन्य इंद्रियों से आकाश और पृथ्वी को प्राप्त हो तथा अंतरिक्ष और जल को प्राप्त हो. यदि इन स्थानों में जाने की तेरी इच्छा हो तो जा अथवा ओषधि आदि में प्रविष्ट हो जा. (७) अजो भागस्तपसस्तं तपस्व तं ते शाचिस्तपतु तं ते अर्चिः. यास्ते शिवास्तन्वो जातवेदस्ताभिर्वहैनं सुकृतामु लोकम्.. (८) हे अग्नि! इस प्रेत का जो जन्म न लेने वाला भाग अर्थात् आत्मा है, उसे तुम अपने तप से संतप्त करो. तेरी दीप्त होती हुई ज्वाला इस प्रेत की आत्मा को तपाए. हे जातवेद अग्नि! तेरा जो ज्वलारूपी कल्याणकारी शरीर है, उस के द्वारा इस प्रेत की आत्मा को उत्तम कर्म करने वालों के लोक में ले जा. (८) यास्ते शोचयो रंहयो जातवेदो याभिरापृणासि दिवमन्तरिक्षम्. अजं यन्तमनु ताः समृण्वतामथेतराभिः शिवतमाभिः शृतं कृधि.. (९) हे जातवेद अग्नि! तेरा जो ज्वलारूपी शरीर है, उस से तू द्युलोक तथा अंतरिक्ष लोक व्याप्त करता है. तेरा ज्वलारूपी शरीर द्युलोक को जाती हुई इस प्रेत की आत्मा के पीछे जाए तथा दूसरे कल्याणकारी शरीरों के पीछे रह गई इस प्रेत की मृत देह को पूरी तरह जला दे. (९) अव सृज पुनरग्ने पितृभ्यो यस्त आहुतश्चरति स्वधावान्. आयुर्वसान उप यातु शेषः सं गच्छतां तन्वा सुवर्चाः.. (१०) हे अग्नि! हवि के रूप में जो प्रेत तुम्हें दिया गया है तथा हमारे प्रति स्वधा से संपन्न हो कर तुम्हारे द्वारा जलाया जा रहा है, उसे तुम पितृलोक के लिए छोड़ दो. उस का पुत्र आयु से संपन्न होता हुआ अपने घर को लौटे. यह प्रेत सुंदर शक्ति वाला तथा पितृलोक में निवास करने वाला हो. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*