अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 799, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअति द्रव श्वानौ सारमेयौ चतुरक्षौ शबलौ साधुना पथा. अधा पितृन्त्सुविदत्राँ अपीहि यमेन ये सधमादं मदन्ति.. (११) हे प्रेत! तू पितृलोक को जाने वाला है. तू सरमा नाम की देवों की कुतिया के श्याम और शबल नाम वाले दोनों पुत्रों के साथ प्रसन्न रहने वाले एवं हव्य संपन्न पितरों के पास पहुंचे. (११) यौ ते श्वानौ यम रक्षितारौ चतुरक्षौ पथिषदी नृचक्षसा. ताभ्यां राजन् परि धेह्येनं स्वस्त्यस्मा अनमीवं च धेहि.. (१२) हे पितरों के प्रभु! पितर मार्ग में स्थित चार नेत्रों वाले जो कुत्ते यमपुर की रक्षा करने के हेतु तुम्हारे द्वारा नियुक्त किए गए हैं, इस प्रेत की रक्षा के लिए उन्हें सौंप दो. यह तुम्हारे लोक में रहने को आया है. इसे बाधा रहित स्थान दो. (१२) उरूणसावसुतृपावुदुम्बलौ यमस्य दूतौ चरतो जनाँ अनु. तावस्मभ्यं दृशये सूर्याय पुनर्दातामसुमद्येह भद्रम्.. (१३) बड़ीबड़ी नाक वाले प्राणियों के प्राणों से तृप्ति को प्राप्त हुए तथा प्राणों का अपहरण करने वाले महाबली यमदूत सभी जगह घूमते हैं. ये दोनों दूत सूर्य दर्शन के निमित्त पांच इंद्रियों वाले प्राण को हमारे शरीर में पुनः स्थापित करें. (१३) सोम एकेभ्यः पवते घृतमेक उपासते. येभ्यो मधु प्रधावति तांश्चिदेवापि गच्छतात्.. (१४) कुछ पितरों के लिए नदी के रूप में सोमरस बहता है. अन्य पितर घृत का उपभोग करते हैं. ब्रह्म याग में अथर्ववेद के मंत्रों का पाठ करने वालों के लिए मधु अर्थात् शहद की नदी है. हे मृतात्मा को प्राप्त प्रेत! तू उन सब को प्राप्त हो. (१४) ये चित् पूर्व ऋतसाता ऋतजाता ऋतावृधः. ऋषीन् तपस्वतो यम तपोज़ाँ अपि गच्छतात्.. (१५) जो पूर्व पुरुष सत्य से युक्त थे, जो साम से उत्पन्न हो कर सत्य की वृद्धि करते थे, हे यम के निमित्त पुरुष! उन तपोबल वाले ऋषियों को तू प्राप्त हो. (१५) तपसा ये अनाधृष्यास्तपसा ये स्वर्ययुः. तपो ये चक्रिरे महस्तांश्चिदेवापि गच्छतात्.. (१६) तप के द्वारा, यज्ञ आदि साधनों के द्वारा, दुष्कर कर्म और उपासना के द्वारा महान तप करते हुए जो पुरुष पुण्य लोकों को जाते हैं, हे पुरुष! तू उन तपस्वियों के लोकों को जा. (१६) ebook converter DEMO Watermarks*