अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 821, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकर. (७३) सूक्त-४ देवता—अग्नि आ रोहत जनित्रीं जातवेदसः पितृयाणैः सं व आ रोहयामि. अवाड्ढव्येषितो हव्यवाह ईजानं युक्ताः सुकृतां धत्त लोके.. (१) हे अग्नियो! तुम अपनी उत्पन्न करने वाली के पास पहुंचो. मैं तुम्हें पितृयान मार्गों से वहां भलीभांति पहुंचाता हूं. हव्यों के वाहक अग्नि हव्यों को वहन करते हैं. हे अग्नियो! तुम मिल कर यज्ञकर्ताओं को श्रेष्ठ कर्म करने वालों के लोकों में पहुंचाओ. (१) देवा यज्ञमृतवः कल्पयन्ति हविः पुरोडाशं सुचो यज्ञायुधानि. तेभिर्याहि पथिभिर्देवयानैर्यरीजानाः स्वर्गं यन्ति लोकम्.. (२) देवगण और वसंत आदि ऋतुएं अनेक प्रकार के यज्ञों की रचना करते हैं. इस यज्ञ में डालने के लिए घृत आदि से बनाए हुए पदार्थों को अग्नि में डालने के लिए चमचे की आकृति के अनेक पात्र बनाते हैं. हे मनुष्य! उन देवयान मार्गों अर्थात् यज्ञ करने की विधियों से तू नित्य प्रति यज्ञ कर. इन देवयान मार्गों से यज्ञ करने वाले जन स्वर्गलोक जाते हैं. (२) ऋतस्य पन्थामनु पश्य साध्वङ्गिरसः सुकृतो येन यन्ति. तेभिर्याहि पथिभिः स्वर्गं यत्रादित्या मधु भक्षयन्ति तृतीये नाके अधि वि श्रयस्व.. (३) हे प्रेत! तू सत्य के कारण रूप मार्गों को भलीभांति जानता हुआ महर्षि अंगिरस आदि के स्वर्ग को जा, जिस मार्ग में अदिति के पुत्र देवगण अमृत का सेवन करते हैं. तू उस तीसरे स्वर्ग में निवास कर. (३) त्रयः सुपर्णा उपरस्य मायू नाकस्य पृष्ठे अधि विष्टपि श्रिताः. स्वर्गा लोका अमृतेन विष्ठा इषमूर्जं यजमानाय दुहाम्.. (४) अग्नि, वायु और सूर्य उत्तम विधि से गमन करने वाले हैं. वायु तथा पर्जन्य मेघ के समान शब्द करते हैं. ये सभी स्वर्गलोक से ऊपर विष्टप में निवास करते हैं. अपने कर्मों से प्राप्त होने वाला यह स्वर्गलोक अमृत से संपन्न है. यह स्वर्ग यज्ञ कर्म का अनुष्ठान करने वाले प्रेत को मनचाहा अन्न तथा रस देने वाला है. (४) जुहूर्दाधार द्यामुपभृदन्तरिक्षं ध्रुवा दाधार पृथिवीं प्रतिष्ठाम्. प्रतीमां लोका घृतपृष्ठाः स्वर्गाः कामंकामं यजमानाय दुहाम्.. (५) होम के पात्र जुहू ने आकाश को पुष्ट किया, उपभूत नाम के यज्ञपात ने अंतरिक्ष को धारण किया तथा स्रुवा नाम के यज्ञ पात्र ने पृथ्वी का पालन किया. यह स्रुवा पात्र पृथ्वी का ebook converter DEMO Watermarks*