अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 824, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपूपवान् क्षीरवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (१६) पिसे हुए गेहूँ में दूध मिला कर तैयार किया हुआ ओदन रूप चरु इस कर्म में अस्थियों के समीप पश्चिम दिशा में रखा रहे. इस संस्कार को प्राप्त हुए प्रेत के लिए स्वर्ग के निर्माता इंद्र आदि देवों में से इस हवि के अधिकारी यहां वर्तमान देवों को मैं प्रसन्न करता हूं. (१६) अपूपवान् दधिवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (१७) पिसे हुए गेहूं तथा दही मिले हुए ओदन रूप चरु इस कर्म में अस्थियों के समीप पश्चिम दिशा में स्थित रहे. इस संस्कार को प्राप्त हुए प्रेत के लिए स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवताओं में से इस हवि के अधिकारी यहां वर्तमान देवताओं को हम प्रसन्न करते रहें. (१७) अपूपवान् द्रप्सवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (१८) पिसे हुए गेहूं और गाय का घी मिले हुए चरु से जिस प्रेत का संस्कार किया गया है, उस के लिए स्वर्ग के निर्माता इंद्र आदि देवताओं में से इस हवि का अधिकारी जो देवता यहां वर्तमान हो, उसे हम प्रसन्न करते हैं. (१८) अपूपवान् घृतवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (१९) मालपूए आदि से युक्त तथा मुग्ध करने वाले अन्य द्रव्यों से युक्त चरु इस यज्ञ में स्थित हो. लोकों और मार्गों का निर्माण करने वाले तथा यहां उपस्थित इंद्र आदि देवों के मध्य जिन के लिए यज्ञ भाग दिया गया है, उन्हें हम प्रसन्न करते हैं. (१९) अपूपवान् मांसवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२०) मालपूए तथा मांस से युक्त यह चरु यहां इस यज्ञ में स्थित हो. हम लोकों और मार्गों का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवों के लिए यज्ञ करते हैं. यज्ञ के भाग का उपभोग करने वाले यहां स्थित रहें. (२०) अपूपवानन्नवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२१) पिसे हुए गेहूं के पूओं से युक्त, अन्न से मिश्रित पवन का ओदन रस यह चरु इस यज्ञ ebook converter DEMO Watermarks*