भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 825, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 825

कार्य में पश्चिम दिशा में स्थित रहे. जिस प्रेत का संस्कार किया जा रहा है, उस के लिए स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवताओं में से इस हवि के जो देवता यहां वर्तमान हैं, हम उन्हें प्रसन्न करते हैं. (२१) अपूपवान् मधुमांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२२) पिसे हुए गेहूं के पूओं से युक्त और शहद मिले हुए कुंभी पक्व भात रूप चरु इस कार्य में अस्थियों के पश्चिम भाग में रखा रहे. जिस का संस्कार किया जा रहा है उस प्रेत के लिए स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवताओं में से इस हवि के अधिकारी जो देवता यहां विद्यमान हैं, हम उन का स्वागत करते हैं. (२२) अपूपवान् रसवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२३) जिस गेहूं तथा छह रसों से युक्त मालपूए से युक्त कुंभी पक्व ओदन रूप चरु इस कार्य में अस्थियों के पश्चिम भाग में स्थित रहे. यह संस्कार जिस प्रेत के लिए किया जा रहा है, उस के लिए स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवताओं में से इस हवि के अधिकारी यहां वर्तमान देवों को हम प्रसन्न करते हैं. (२३) अपूपवानपवांश्चरुरेह सीदतु. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२४) जिस गेहूं तथा अन्य प्रकार के पूओं से युक्त कुंभी पक्व ओदन रूप चरु इस कार्य में अस्थियों के पश्चिम भाग में रहे. यह संस्कार जिस प्रेत के लिए किया जा रहा है, उस के लिए स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र आदि देवताओं में से हवि के अधिकारी यहां वर्तमान देवताओं को हम प्रसन्न करते हैं. (२४) अपूपापिहितान् कुम्भान् यांस्ते देवा अधारयन्. ते ते सन्तु स्वधावन्तो मधुमन्तो घृतश्रुतः.. (२५) हे प्रेत! हवि के अधिकारी जिन देवताओं ने चरु से पूर्ण कलशों को अपने भाग के रूप में ग्रहण किया है, वे चरु तुझे परलोक में स्वधा से युक्त करें. (२५) यास्ते धाना अनुकिरामि तिलमिश्राः स्वधावतीः. तास्ते सन्तूद्ध्वीः प्रध्वीस्तास्ते यमो राजानु मन्यताम्.. (२६) अक्षितिं भूयसीम्.. (२७) हे प्रेत! तेरे लिए मैं जिन काले तिलों से युक्त जौ की खीलों को बिखेरता हूं, वे तुझे परलोक में प्रचुर परिमाण में प्राप्त हों तथा उन्हें खाने के लिए यमराज तुझे आज्ञा दें. ebook converter DEMO Watermarks*