भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 886

समुद्र में उत्पन्न हो. (२) उभयोरग्रभं नामास्मा अरिष्टतातये.. (३) हे गुग्गुलु! मैं तुझे दोनों प्रकार के रोगों का नाम बताता हूं. दुःख देने वाले वर्तमान रोग के विनाश हेतु मैं तुझ से प्रार्थना करता हूं. (३) सूक्त-३९ देवता—कुष्ठ ऐतु देवस्त्रायमाणः कुष्ठो हिमवतस्परि. तक्मानं सर्वं नाशय सर्वांश्च यातुधान्यः.. (१) कूठ नाम की विशेष ओषधि द्युलोक में उत्पन्न हुई है. यह हमारी रक्षा करती हुई हिमवान पर्वत से आए. वह सभी क्लेशकारी रोगों का नाश करे तथा सभी राक्षसियों को नष्ट करे. (१) त्रीणि ते कुष्ठ नामानि नद्यमारो नद्यारिषः. नद्यायं पुरुषो रिषत्. यस्मै परिब्रवीमि त्वा सायंप्रातरथो दिवा.. (२) हे कुष्ठ! तुम्हारे तीन नाम नद्यमार, नद्यारिष और नद्य हैं. तुम्हारा नाम लेने के अभाव में यह पुरुष हिंसित हुआ है. मैं रोग से दुःखी पुरुष के लिए तुम्हारा नाम मंत्र के रूप में बता रहा हूं. वह सायंकाल, प्रातः और दिन में तुम्हारे नाम का उच्चारण करे. (२) जीवला नाम ते माता जीवन्तो नाम ते पिता. नद्यायं पुरुषो रिषत्. यस्मै परिब्रवीमि त्वासायंप्रातरथो दिवा.. (३) हे कुष्ठ नाम की ओषधि! जीवला तेरी माता है और जीवंत तेरे पिता हैं. तुम्हारा नाम न लेने के कारण इस पुरुष की हिंसा हुई है. मैं रोग से दुःखी पुरुष को तुम्हारा नाम मंत्र के रूप में प्रातः, सायं और दिन में उच्चारण हेतु बताता हूं. (३) उत्तमो अस्योषधीनामनड्वाण् जगतामिव व्याघ्रः श्वपदामिव. नद्यायं पुरुषो रिषत्. यस्मै परिब्रवीमि सायंप्रातरथो दिवा.. (४) हे कुष्ठ ओषधि! जिस प्रकार गति करने वाला बैल श्रेष्ठ है उसी प्रकार ओषधियों में तुम श्रेष्ठ हो. जंगली पशुओं में बाघ जिस प्रकार श्रेष्ठ है. उसी प्रकार तुम ओषधियों में श्रेष्ठ हो. (४) ebook converter DEMO Watermarks*