भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 894, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 894

सूर्य के समान चारों दिशाओं को प्रकाशित करते हुए स्थिर रूप में रहो. ये सभी दिशाएं तुम्हें बल प्रदान करें. (४) आङ्क्ष्वैकं मणिमेकं कृणुष्व स्नाह्येकेना पिबैकमेषाम्. चतुर्वीरं नैर्ऋतेभ्यश्चतुर्भ्यो ग्राह्या बन्धेभ्यः परि पात्वस्मान्.. (५) हे पुरुष! एक आंजन को अपनी आंख में धारण करो तथा दूसरे आंजन को मणि बनाओ. एक आंजन से स्नान करो. इस प्रकार पर्वत की तीन चोटियों पर उत्पन्न तीन आंजनों का उपयोग करो. ये तीनों वहां धारण की जाएं. इस का ज्ञान न कर के इच्छानुसार इन का प्रयोग करो. चार शक्तियों वाले इस आंजन को ग्रहण करने के योग्य ओषधि अर्थात् जड़ीबूटी के साथ निर्ऋति देवता से संबंधित बंधनों से हमारी रक्षा करो. (५) अग्निर्माग्निनावतु प्राणायापानायुषे वर्चस ओजसे तेजसे स्वस्तये सुभूतये स्वाहा.. (६) अग्नि अपने अग्नित्व धर्म के द्वारा मेरी रक्षा करें. अग्नि प्राण की स्थिरता के लिए, अपान की स्थिरता के लिए, आयु की वृद्धि के लिए, वेद के अध्ययन से उत्पन्न तेज के लिए, बल के लिए, शरीर की कांति के लिए, कुशल के लिए तथा शोभन संपत्ति के लिए मेरी रक्षा करें. यह आहुति भलीभांति अग्नि को प्राप्त हो. (६) इन्द्रो मेन्द्रियेणावतु प्राणायापानायायुषे वर्चस ओजसे तेजसे स्वस्तये सुभूतये स्वाहा.. (७) इंद्र अपनी असाधारण शक्ति से मेरी रक्षा करें. इंद्र प्राण की स्थिरता के लिए, अपान की स्थिरता के लिए, आयु की वृद्धि के लिए, शरीर की कांति के लिए, कुशल के लिए तथा शोभन संपत्ति के लिए मेरी रक्षा करें. यह आहुति भलीभांति इंद्र को प्राप्त हो. (७) सोमो मा सौम्येनावतु प्राणायापानायायुषे वर्चस ओजसे तेजसे स्वस्तये सुभूतये स्वाहा.. (८) सोम अपनी शक्ति प्राण की स्थिरता के लिए, अपान की स्थिरता के लिए, आयु की वृद्धि के लिए, शरीर की कांति के लिए, कुशल के लिए तथा शोभन संपत्ति के लिए मेरी रक्षा करें. यह आहुति सोम को भलीभांति प्राप्त हो. (८) भगो मा भगेनावतु प्राणायापानायायुषे वर्चस ओजसे तेजसे स्वस्तये सुभूतये स्वाहा.. (९) भग देव अपनी शक्ति से प्राण की स्थिरता के लिए, अपान की स्थिरता के लिए, आयु की वृद्धि के लिए, शरीर की कांति के लिए, कुशल के लिए तथा शोभन संपत्ति के लिए मेरी ebook converter DEMO Watermarks*