भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 897, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 897

जाता है, अलगअलग दिखाई नहीं देता है. जगत् कांपता है, तथा प्राणी इस रात्रि में इधरउधर जाने में असमर्थ हो जाते हैं. हे अंधकार वाली रात्रि! सर्प, बाघ, चोर आदि की बाधा से रहित हम तेरे अंतिम नाम अर्थात् प्रातःकाल को प्राप्त करें. हे कल्याणकारिणी रात्रि! हम कल्याण को प्राप्त करें. (२) ये ते रात्रि नृचक्षसो द्रष्टारो नवतिर्नव. अशीतिः सन्त्यष्टा उतो ते सप्त सप्ततिः.. (३) हे रात्रि! मनुष्यों के कर्म फल के देखने वाले तुम्हारे जो निन्यानवे गण देवता हैं, अठासी गण देवता हैं तथा सतहत्तर गण देवता हैं, वे तुम्हारी महिमा का विस्तार करते हैं. (३) षष्टिश्च षट् च रेवति पञ्चाशत् पञ्च सुम्नयि. चत्वारश्चत्वारिंशच्च त्रयस्त्रिंशच्च वाजिनि.. (४) हे धन प्रदान करने वाली रात्रि! छियासठ और पचपन जो गण देवता हैं, हे सुख देने वाली रात्रि! चवालीस जो गण देवता हैं, हे अन्न प्रदान करने वाली रात्रि! तैंतीस जो गण देवता हैं, वे तुम्हारी महिमा का विस्तार करते हैं. (४) द्वौ च ते विंशतिश्च ते राज्येकादशावमाः. तेभिर्नो अद्य पायुभिर्नु पाहि दुहितर्दिवः.. (५) हे रात्रि! तुम्हारे जो बाईस और ग्यारह गण देवता हैं तथा इस से कम संख्या वाले जो गण देवता हैं, हे द्युलोक की पुत्री रात्रि! इस समय उन रक्षक गण देवों के साथ हमारी रक्षा करो. (५) रक्षा माकिर्नो अघशंस ईशत मा नो दुःशंस ईशत. मा नो अद्य गवां स्तेनो मावीनां वृक ईशत.. (६) हे रात्रि! हमारा पालन करो, पाप कर्म करने की बात कहने वाला कोई भी हमें बाधा पहुंचाने में समर्थ न हो. दुष्टता पूर्ण वचन बोलने वाला हमें बाधा न पहुंचाए. हे रात्रि! आज चोर हमारी सभी गायों को चुराने में समर्थ न हो. भेड़िया हमारी भेड़ों का बलपूर्वक अपहरण करने में समर्थ न हो. (६) माश्वानां भद्रे तस्करो मा नृणां यातुधान्यः. परमेभिः पथिभि स्तेनो धावतु तस्करः. परेण दत्वती रज्जुः परेणाघायुरर्षतु.. (७) हे भली रात्रि! चोर हमारे घोड़ों को चुराने में समर्थ न हो तथा यातुधान हमारे पुत्रों आदि के स्वामी न बन सकें. चोर और तस्कर अति दूर मार्गों से अपने साधनों द्वारा दूर भाग जाएं. दांतों वाली रस्सी के समान विशाल सर्प दूर भाग जाएं. दूसरों की हिंसा करने के इच्छुक हम ebook converter DEMO Watermarks*

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 897, कुल 1063 में से · BharatKosha