भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 907, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 907

हे गृहपति द्वारा आधान की गई अग्नि! तुम सायं और प्रातः हमें सुख देने वाली बनो. हे धन प्रदान करने वाली अग्नि! तुम वृद्धि प्रदान करो. हम तुम्हें हवि द्वारा दीप्त करते हुए सौ वर्ष तक जीवित रहें. (४) अपश्चा दग्धान्नस्य भूयासम्. अन्नादायान्नपतये रुद्राय नमो अग्नये. सभ्यः सभां मे पाहि ये च सभ्याः सभासदः.. (५) बटलोई के निचले भाग में जले हुए भोजन को प्राप्त करने वाला मैं न बनूं. तात्पर्य यह है कि मैं अधिक भोजन प्राप्त करूं. अन्न प्रदान करने वाले अग्नि और अन्न के स्वामी रुद्र के लिए नमस्कार है. हे सभा के योग्य अग्नि! तुम मेरी सभा अर्थात् पुत्र, मित्र, पशु आदि के समूह की रक्षा करो. जो उस समूह में स्थित रहने वाले हैं, हे अग्नि देव! उन की रक्षा करो. (५) त्वमिन्द्रा पुरुहूत विश्वमायुर्व्य श्रवत्. अहरहर्बलिमित्ते हरन्तो ऽ श्वायेव तिष्ठते घासमग्ने.. (६) हे बहुतों के द्वारा आह्वान किए गए इंद्र और ऐश्वर्य वाले अग्नि! तुम हमें संपूर्ण अन्न और जीवन प्राप्त कराओ. बंधे हुए घोड़े को जिस प्रकार घास प्राप्त कराई जाती है, उसी प्रकार तुम्हें प्रतिदिन हवि प्रदान करते हुए हम पूर्ण आयु प्राप्त करें. (६) सूक्त—५६ देवता—दुःस्वप्न नाशन यमस्य लोकादध्या बभूविथ प्रमदा मर्त्यान् प्र युनक्षि धीरः. एकाकिना सरथं यासि विद्वान्त्स्वप्नं मिमानो असुरस्य योनौ.. (१) हे बुरे स्वप्न के अभिमानी क्रूर पिशाच! तू यमलोक से धरती पर आया है. तू निर्भय हो कर स्त्रियों और पुरुषों के समीप पहुंच जाता है. शरीरधारियों की आयु की वृद्धि और हानि जानता हुआ तू प्राण के आत्मीय स्थान हृदय में स्वप्न के कष्ट का निर्माण करता हुआ सहायक हीन रथ के द्वारा यमलोक प्राप्त कराता है. (१) बन्धस्त्वाग्रे विश्वचया अपश्यत् पुरा रात्र्या जनितोरेके अह्नि. ततः स्वप्नेदमध्या बभूविथ भिषग्भ्यो रूपमपगूहमानः.. (२) हे दुःस्वप्न के अभिमानी! सब के स्रष्टा और विधाता ने तुझे सृष्टि से पहले देखा था. मानस, स्थापत्य आदि ने तुझे दिवस और रात्रि के जन्म से पूर्व देखा था. हे स्वप्न! तुम इस जगत् को व्याप्त कर रहे हो. तुम चिकित्सकों से अपना रूप छिपाए रहते हो. तात्पर्य यह है कि चिकित्सक तुम्हारा प्रभाव समाप्त नहीं कर पाते. (२) ebook converter DEMO Watermarks*